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न्यूजीलैंड से ज्यादा Pakistan Super League पर फोकस, Luke Ronchi और Jacob Oram का फैसला


नई दिल्ली। न्यूजीलैंड की राष्ट्रीय क्रिकेट टीम के सहायक कोच ल्यूक रोंची और जैकब ओरम की आगामी अंतर्राष्ट्रीय सीरीज के दौरान टीम के साथ नहीं होंगे। दोनों कोच पाकिस्तान की टी20 लीग पाकिस्तान सुपर लीग 2026 में कोचिंग करते नजर आए।

दक्षिण अफ्रीका और बांग्लादेश की सीरीज के खिलाफ न्यूजीलैंड टीम का कार्यक्रम मार्च भरा हुआ है, लेकिन उसी समय पीएसएल का कार्यक्रम भी है। इसी कारण दोनों कोचों ने लीग में अपनी वैलेट को प्राथमिकता देने का निर्णय लिया है।

इब्राहिम यूनाइटेड के साथ जुड़े हुए हैं दोनों
ल्यूक रोंची और जैकब ओरम पीएसएल फ़्राई इस्लामाबाद यूनाइटेड के साथ कोचिंग स्टाफ में शामिल हैं। रोंची टीम के प्रमुख कोच की भूमिका निभा रहे हैं, जबकि ओरम सहायक कोच के रूप में शामिल हैं। रोंची पहले इस टीम के लिए भी खिलाड़ी के रूप में खेले हैं और उनके साथ उनकी लंबी डील चल रही है।

न्यूजीलैंड क्रिकेट ने दिया समर्थन
न्यूजीलैंड क्रिकेट के लाइसेंसिंग मैनेजर माइक सैंडेल ने कहा कि दोनों कोचों के लिए यह अपने अनुभव को बढ़ाने का अच्छा मौका है।

उन्होंने कहा, “ल्यूक और ओरम के पास न्यूजीलैंड क्रिकेट के शानदार प्रदर्शन के लिए अपने कोचिंग अनुभव को बढ़ाने का शानदार अवसर है। हमारे खिलाड़ियों की तरह हमारे कोच भी दुनिया भर में मांग में हैं। हमें विश्वास है कि पीएसएल का अनुभव न्यूजीलैंड क्रिकेट में भविष्य के लिए शानदार साबित होगा।

उनकी जगह ये कोच कोचेंगे जिम्मेदारी
दोनों कोचों की गैरमौजूदगी में घरेलू कोचिंग स्टाफ टीम के साथ काम करेंगे। वेलिंगटन के कोच जॉनी बैसेट-ग्राहम और न्यूजीलैंड क्रिकेट नेटवर्क के कोच ग्रीम एल्ड्रिज दक्षिण अफ्रीका सीरीज के दौरान मुख्य कोच रॉब वाल्टर की मदद लेंगे। इसके अलावा कैंटरबरी के ब्रेंडन डोनकर्स बांग्लादेश के दौरे के दौरान टीम के साथ काम करेंगे।

न्यूज़ीलैंड का नियोजित कार्यक्रम
न्यूजीलैंड को 15 से 25 मार्च तक दक्षिण अफ्रीका की राष्ट्रीय क्रिकेट टीम के खिलाफ पांच टी20 मैचों की सीरीज खेलनी है। इसके बाद टीम बांग्लादेश की राष्ट्रीय क्रिकेट टीम का दौरा करेगी, जहां तीन और तीन टी20 मैचों की सीरीज रिलीज होगी।
वहीं दूसरी ओर पीएसएलपी 2026 की शुरुआत 26 मार्च से हो रही है। ऐसे में रोंची और ओरम इस लीग में अपनी कोचिंग जिम्मेदारी बैचलर दिखाई देंगे।

क्रिकेट विशेषज्ञ का मानना ​​है कि दुनिया भर में फ्रेंचाइजी लीगों के बढ़ते प्रभाव के कारण अब खिलाड़ियों के साथ-साथ कोचों की भी मांग लगातार बढ़ रही है, जिसका असर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट कार्यक्रम पर भी देखने को मिल रहा है।

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