मंत्री ने अपनी आंखों के सामने हल्दी का नमूना केमिकल में डालते ही पीले रंग से लाल रंग में बदलते देखा, जिसे देखकर वे चौंक गए। इस घटना को अपने मुख्य संबोधन में भी उन्होंने शामिल किया और जनता से अपील की कि वे अपने हक के लिए जागरूक और “जिद्दी उपभोक्ता” बनें। मंत्री ने उदाहरण देते हुए प्रख्यात दानवीर और विधिवेत्ता डॉ. हरिसिंह गौर की बहादुरी की ओर इशारा किया, जिन्होंने भ्रष्टाचार और प्रशासनिक गड़बड़ियों के खिलाफ सख्ती से लड़ाई लड़ी।
मंत्री ने नापतौल में होने वाली अनियमितताओं की भी ओर ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने बताया कि 2 किलो और आधा किलो के बांट का वजन बराबर दिखाने वाले तराजू में गड़बड़ी पाई गई। उन्होंने उपभोक्ताओं से अपील की कि वे खरीदारी करते समय तराजू और पैकेजिंग का ध्यान रखें।
इस अवसर पर मंत्री ने 2019 के नए उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम की जानकारी देते हुए बताया कि अब शिकायत करना आसान है। उपभोक्ता घर बैठे ऑनलाइन शिकायत दर्ज कर सकते हैं, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सुनवाई में शामिल हो सकते हैं। अधिनियम में उपभोक्ताओं के छह प्रमुख अधिकार शामिल हैं: चुनने का अधिकार, जानकारी का अधिकार, सुरक्षा का अधिकार, सुनवाई का अधिकार, समस्याओं का निराकरण और उपभोक्ता शिक्षा का अधिकार।
राज्य और जिला उपभोक्ता आयोगों में शिकायतों के निराकरण की प्रक्रिया में तेजी आई है। वर्ष 2025–26 में राज्य उपभोक्ता आयोग ने करीब 3 हजार मामलों का निपटारा किया, जबकि जिला आयोगों में 14 हजार से अधिक मामलों का समाधान हो चुका है। ऑनलाइन माध्यम से शिकायतें भी बढ़ी हैं; दिसंबर 2020 से अब तक राज्य आयोग में 7,500+ और जिला आयोगों में 26,000+ शिकायतें दर्ज की गई हैं।
कार्यक्रम में स्वैच्छिक उपभोक्ता संगठनों और छात्रों को भी सम्मानित किया गया। कटनी की संस्था अखिल भारतीय उपभोक्ता उत्थान संगठन को प्रथम पुरस्कार (1,11,000 रुपये) मिला, जबकि ग्वालियर की प्राकृतिक चिकित्सालय महाविद्यालय समिति को द्वितीय पुरस्कार (51,000 रुपये) प्रदान किया गया। छात्राओं के लिए आयोजित निबंध और पोस्टर प्रतियोगिता में उज्जैन, छतरपुर और इंदौर की छात्राओं ने प्रमुख स्थान प्राप्त किए।
मंत्री राजपूत ने अंत में चेतावनी दी कि अनुचित व्यापारिक प्रथाओं और मिलावटखोरी पर नकेल तभी कसी जा सकती है जब उपभोक्ता अपने अधिकारों के प्रति जागरूक और सतर्क रहें, शिकायत करने में हिचकिचाएं नहीं।
इस कार्यक्रम ने उपभोक्ताओं को खाद्य सुरक्षा, अधिकारों और जागरूकता की दिशा में महत्वपूर्ण संदेश दिया, साथ ही डिजिटल माध्यम और नई तकनीकों के जरिए शिकायत और सुनवाई को और सुलभ बनाया।