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धार भोजशाला विवाद: हाईकोर्ट करेगा निरीक्षण, ASI रिपोर्ट में 12वीं–20वीं सदी के शिलालेख मिले, 2 अप्रैल को निर्णायक सुनवाई


भोपाल। मध्यप्रदेश के धार जिले में स्थित भोजशाला मामले में हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने सोमवार को सुनवाई की। इस दौरान बेंच ने कहा कि अगली सुनवाई 2 अप्रैल को होगी और सुनवाई से पहले जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी भोजशाला का निरीक्षण करेंगे। निरीक्षण से पहले याचिकाकर्ताओं की दलीलें सुनी जाएंगी, उसके बाद पक्षकारों की सुनवाई होगी। मुस्लिम पक्ष ने एएसआई की सर्वे रिपोर्ट पर आपत्ति जताई है।

सुनवाई के दौरान अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल सुनील जैन, राज्य की ओर से एडवोकेट जनरल प्रशांत सिंह और अधिवक्ता विष्णुशंकर जैन वीडियो कांफ्रेंसिंग से उपस्थित रहे। वरिष्ठ अधिवक्ता शोभा मेनन के साथ हिंदू फ्रंट की ओर से याचिकाकर्ता आशीष गोयल और अधिवक्ता विनय जोशी भी अदालत में मौजूद रहे।

भोजशाला मामले में कई याचिकाएं दायर की गई हैं, जिनमें काजी जकुल्लाह, अंतर सिंह, मौलाना कमालुद्दीन वेलफेयर सोसाइटी (धार) के अब्दुल समद खान, कुलदीप तिवारी और हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की अध्यक्ष रंजना अग्निहोत्री शामिल हैं। 23 फरवरी को हाईकोर्ट ने सभी पक्षकारों को एएसआई की सर्वे रिपोर्ट पर अपनी आपत्तियां और सुझाव दो हफ्ते के भीतर दाखिल करने के निर्देश दिए थे।

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने हाईकोर्ट के आदेश पर 22 मार्च 2024 से लगभग 100 दिन तक परिसर और उससे 50 मीटर की परिधि में सर्वेक्षण, जांच और सीमित उत्खनन किया। टीम में पुरातत्वविद्, अभिलेखविद् और रसायनविद् समेत अन्य विशेषज्ञ शामिल थे। पहले ही रिपोर्ट की प्रतियां याचिकाकर्ताओं को उपलब्ध कराई जा चुकी हैं।

एचएसआई रिपोर्ट में 12वीं से 20वीं सदी तक के शिलालेखों के प्रमाण मिले हैं। इनमें संस्कृत-प्राकृत शिलालेख, नागरी लिपि और अरबी-फारसी लेख शामिल हैं। रिपोर्ट के अनुसार भोजशाला परिसर में 56 अरबी-फारसी शिलालेख मिले, जिनमें दुआएं, नाम और धार्मिक वाक्य लिखे हैं। साथ ही 12वीं–16वीं सदी के संस्कृत-प्राकृत शिलालेख मिले, जिनमें पारिजातमंजरी-नाटिका और अवनिकर्मसातम जैसे उल्लेख हैं। कुछ पत्थरों पर लिखावट मिटाकर दोबारा इस्तेमाल के संकेत भी देखे गए।

रिपोर्ट में यह निष्कर्ष निकाला गया है कि भोजशाला परिसर अलग-अलग कालखंडों में धार्मिक, शैक्षिक और सामाजिक कार्यों के लिए उपयोग में रहा। ब्रिटिश काल से अब तक इसके संरक्षण के प्रयासों का भी जिक्र किया गया है। कोर्ट ने सभी पक्षों को निर्देशित किया है कि वे 98 दिन तक चली वैज्ञानिक जांच रिपोर्ट पर अपनी लिखित आपत्तियां और सुझाव अगली सुनवाई से पहले दाखिल करें।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार इस मामले की सुनवाई जल्द से जल्द पूरी की जानी है। ट्रांसफर के कारण पहले जबलपुर प्रिंसिपल बेंच में चली सुनवाई अब फिर से इंदौर खंडपीठ पर आ गई है। हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की ओर से अधिवक्ता विनय जोशी ने कहा कि दो सप्ताह के भीतर एएसआई रिपोर्ट पर आपत्तियां पेश कर दी जाएंगी।

मुख्य बिंदु: 2 अप्रैल को अगली सुनवाई होगी, जस्टिस भोजशाला का निरीक्षण करेंगे, मुस्लिम पक्ष ने रिपोर्ट पर आपत्ति जताई, ASI ने 100 दिन तक सर्वे किया, 12वीं से 20वीं सदी के शिलालेख मिले।

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