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LPG किल्लत के बाद अब दूध सप्लाई पर गहराया संकट, डेयरी सेक्टर के पास सिर्फ 10 दिन का पैकिंग स्टॉक



नई दिल्ली। खाड़ी क्षेत्र में जारी युद्ध का असर अब भारत में भी दिखाई देने लगा है। ईरान द्वारा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर पाबंदी लगाए जाने से वैश्विक ऊर्जा सप्लाई चेन प्रभावित हुई है। मिडिल ईस्ट, जो दुनिया में तेल और गैस का बड़ा उत्पादक और सप्लायर है, इस समय युद्ध की चपेट में है। तेल और गैस रिफाइनरियों पर हमलों के कारण आयात-निर्यात का संतुलन बिगड़ गया है, जिसका असर भारत की ऊर्जा आपूर्ति पर भी पड़ रहा है।

हालात को देखते हुए सरकार को सिलेंडर से जुड़े कुछ नियमों में भी बदलाव करना पड़ा है। इसी बीच गैस की कमी का असर अब डेयरी सेक्टर पर भी पड़ने लगा है।

गैस संकट से दूध सप्लाई पर खतरा

ऊर्जा संकट के चलते डेयरी उद्योग के सामने नई चुनौती खड़ी हो गई है। डेयरी संचालकों का कहना है कि एलपीजी की कमी से दूध की प्रोसेसिंग, पाश्चुरीकरण और पैकेजिंग का काम प्रभावित हो रहा है। यदि जल्द ही गैस आपूर्ति सामान्य नहीं हुई तो आने वाले दिनों में दूध की सप्लाई भी बाधित हो सकती है।

उद्योग से जुड़े लोगों के अनुसार, अगर मौजूदा स्थिति बनी रही तो करीब 10 दिनों में हालात और गंभीर हो सकते हैं।

डेयरी सेक्टर में बढ़ी चिंता

दूध को सुरक्षित रखने के लिए पाश्चुरीकरण प्रक्रिया जरूरी होती है, जिसमें बड़ी मात्रा में एलपीजी की आवश्यकता होती है। इसके अलावा दूध की प्लास्टिक पैकेजिंग और कार्टन तैयार करने में भी गैस का उपयोग होता है। गैस की कमी के कारण कई कंपनियां पैकेजिंग सामग्री तैयार नहीं कर पा रही हैं।

महाराष्ट्र का डेयरी सेक्टर इस संकट से सबसे अधिक प्रभावित बताया जा रहा है। गोवर्धन डेयरी के संस्थापक देवेंद्र शाह के मुताबिक, उनके पास पैकेजिंग मटेरियल का स्टॉक केवल 10 दिन का बचा है। यदि जल्द ही गैस संकट खत्म नहीं हुआ तो दूध की पैकेजिंग और सप्लाई दोनों प्रभावित हो सकती हैं।

क्यों पैदा हुआ संकट

भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर है। देश 40 से अधिक देशों से कच्चा तेल खरीदता है और प्राकृतिक गैस का बड़ा हिस्सा मिडिल ईस्ट से आता है। भारत अपनी जरूरत का लगभग 88 प्रतिशत कच्चा तेल, 50 प्रतिशत प्राकृतिक गैस और 60 प्रतिशत एलपीजी आयात से ही पूरा करता है।

28 फरवरी को इजरायल और ईरान के बीच शुरू हुए संघर्ष के बाद ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट को बंद कर दिया। यह समुद्री मार्ग वैश्विक ऊर्जा सप्लाई का करीब 20 प्रतिशत और भारत के तेल-गैस आयात का लगभग 50 से 55 प्रतिशत हिस्सा वहन करता है। इस मार्ग के बंद होने से भारत में तेल और गैस की आपूर्ति प्रभावित हुई है और देश को अपने रिजर्व स्टॉक पर निर्भर रहना पड़ रहा है।

फिलहाल भारत सरकार गैस से लदे जहाजों को सुरक्षित रूप से होर्मुज पार कराने के लिए ईरान से बातचीत कर रही है। एलपीजी से लदे दो जहाज ‘शिवालिक’ और ‘नंदा देवी’ भारत पहुंच चुके हैं, जबकि अन्य जहाजों को भी इस मार्ग से निकालने की कोशिशें जारी हैं।

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