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दर्श अमावस्या पर बन रहा खास संयोग विजय मुहूर्त और अमृत काल में करें पूजा मिलेगा पितरों का आशीर्वाद


नई दिल्ली, 18 मार्च का दिन हिंदू धर्म में विशेष आध्यात्मिक महत्व रखता है क्योंकि इस दिन दर्श अमावस्या मनाई जा रही है हिंदू पंचांग के अनुसार प्रत्येक माह की अमावस्या को दर्श अमावस्या कहा जाता है इस दिन चंद्रमा पूरी तरह अदृश्य होता है और इसे आत्मचिंतन तथा पितरों के स्मरण का समय माना जाता है

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन पितरों के तर्पण श्राद्ध और जल अर्पण का विशेष महत्व होता है ऐसा माना जाता है कि इस दिन किए गए कर्मों से पितरों की आत्मा को शांति मिलती है और वे अपने वंशजों को सुख समृद्धि और उत्तम स्वास्थ्य का आशीर्वाद देते हैं साथ ही दान पुण्य और स्नान करने से पितृ दोष दूर होता है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है

पंचांग के अनुसार इस दिन सूर्योदय सुबह 6 बजकर 28 मिनट पर होगा और सूर्यास्त शाम 6 बजकर 31 मिनट पर रहेगा कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि सुबह 8 बजकर 25 मिनट तक रहेगी जिसके बाद अमावस्या तिथि प्रारंभ हो जाएगी नक्षत्र पूर्व भाद्रपद सुबह 5 बजकर 21 मिनट तक रहेगा इसके बाद उत्तर भाद्रपद नक्षत्र प्रभावी होगा शुभ योग सुबह 4 बजकर 1 मिनट से शुरू होकर अगले दिन तक रहेगा जबकि करण शकुनि सुबह 8 बजकर 25 मिनट तक रहेगा

शुभ मुहूर्तों की बात करें तो ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4 बजकर 52 मिनट से 5 बजकर 40 मिनट तक रहेगा जो ध्यान और साधना के लिए अत्यंत उत्तम माना जाता है विजय मुहूर्त दोपहर 2 बजकर 30 मिनट से 3 बजकर 18 मिनट तक रहेगा जिसमें महत्वपूर्ण कार्यों की शुरुआत की जा सकती है गोधूलि मुहूर्त शाम 6 बजकर 29 मिनट से 6 बजकर 53 मिनट तक रहेगा जो पूजा पाठ के लिए उपयुक्त है वहीं अमृत काल रात 9 बजकर 37 मिनट से 11 बजकर 10 मिनट तक रहेगा जो अत्यंत शुभ फलदायी समय माना गया है निशीथ मुहूर्त देर रात 12 बजकर 5 मिनट से 12 बजकर 53 मिनट तक रहेगा हालांकि इस दिन अभिजित मुहूर्त नहीं है

अशुभ समय की बात करें तो राहुकाल दोपहर 12 बजकर 29 मिनट से 2 बजे तक रहेगा यमगंड सुबह 7 बजकर 58 मिनट से 9 बजकर 28 मिनट तक और गुलिक काल सुबह 10 बजकर 59 मिनट से दोपहर 12 बजकर 29 मिनट तक रहेगा इसके अलावा दुर्मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 5 मिनट से 12 बजकर 53 मिनट तक रहेगा इन समयों में शुभ कार्यों से बचने की सलाह दी जाती है

इस दिन एक और महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि पूरा दिन पंचक प्रभावी रहेगा पंचक को ज्योतिष में संवेदनशील समय माना जाता है जिसमें कुछ विशेष कार्यों को टालना उचित माना जाता है हालांकि पूजा पाठ दान और पितृ तर्पण जैसे धार्मिक कार्य इस दौरान किए जा सकते हैं

18 मार्च की दर्श अमावस्या आध्यात्मिक साधना पितृ तर्पण और आत्मशुद्धि के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण अवसर है इस दिन सही मुहूर्त में किए गए धार्मिक कार्य जीवन में सुख शांति और समृद्धि लाने वाले माने जाते हैं

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