इस दौरान 10 MQ-9 रीपर ड्रोन भी तबाह हो चुके हैं। इनमें से 9 को ईरानी एयर डिफेंस सिस्टम ने मार गिराया, जबकि एक ड्रोन जॉर्डन के एयरफील्ड पर मिसाइल हमले की चपेट में आया और दो तकनीकी कारणों से नष्ट हुए। रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, ये मानव रहित ड्रोन जानबूझकर उच्च जोखिम वाले क्षेत्र में भेजे जाते हैं ताकि नुकसान न्यूनतम रहे।
रिपोर्ट में तकनीकी खराबी और गलतियों के कारण हुए नुकसान पर भी ध्यान दिया गया है। एक ऑपरेशन के दौरान KC-135 रिफ्यूलिंग टैंकर के दुर्घटनाग्रस्त होने से चालक दल के सभी 6 सदस्यों की मौत हुई। वहीं, कुवैत में अपनी ही सेना की गलत पहचान के चलते तीन अमेरिकी F-15 फाइटर मार गिराए गए। इसी बीच सऊदी अरब के बेस पर ईरानी मिसाइल हमले में पांच KC-135 विमान क्षतिग्रस्त हुए।
आम तौर पर अमेरिकी वायुसेना युद्ध में एयर सुपीरियरिटी हासिल कर लेती है, लेकिन ईरान के खिलाफ यह चुनौतीपूर्ण साबित हो रही है। अधिकारियों ने माना है कि अमेरिका केवल स्थानीय स्तर पर हवाई हमलों में दक्ष है, पूरे ईरानी आकाश पर उनका कब्जा नहीं है। हाल ही में एक F-35 फाइटर जेट को ईरानी गोलाबारी के बाद इमरजेंसी लैंडिंग करनी पड़ी; पायलट सुरक्षित बच गए।
ईरान ने अपने ‘साउथ पार्स’ गैस फील्ड पर हुए हमलों का बदला लेने के लिए कतर और सऊदी अरब के ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर हमले तेज कर दिए हैं। हॉर्मुज जलडमरूमध्य जैसे रणनीतिक मार्गों को सुरक्षित करना अमेरिका के लिए चुनौती बना हुआ है, क्योंकि ईरान का सक्रिय एयर डिफेंस सिस्टम लगातार खतरा पैदा कर रहा है।