प्रकृति के अद्भुत नजारे
लुंगलेई अपने नाम की तरह अनोखा है। इसका अर्थ है “चट्टानों का पुल”, और यह 1222 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। आइजोल से 169 किलोमीटर दूर यह शहर पहाड़ों, नदियों और हरे-भरे जंगलों के खूबसूरत संगम का प्रतीक है। यहां की नदियों का पानी इतना साफ होता है कि आप तल में बैठे कंकड़ों को आसानी से देख सकते हैं। गर्मियों में यह जगह विशेष रूप से पर्यटकों को आकर्षित करती है।
खावंगलुंग वन्यजीव अभयारण्य
प्रकृति प्रेमियों और वन्यजीव प्रेमियों के लिए खावंगलुंग वन्यजीव अभयारण्य सबसे पसंदीदा जगह है। यहां पर्यटक तेंदुआ, सांभर, बार्किंग डियर और हूलॉक गिब्बन जैसे वन्यजीवों को देख सकते हैं। अभयारण्य में सफारी का अनुभव भी लिया जा सकता है। मार्च से अक्टूबर का समय घूमने के लिए सबसे अच्छा माना जाता है।
फुननाउमा की चट्टान और ट्रैकिंग का रोमांच
लुंगपुई शहर से 100 किलोमीटर दूर लुंगपुई त्लांग या फुननाउमा की चट्टान स्थित है। यह लुंगपुई की सबसे पुरानी और बड़ी चट्टान है। यहां तक पहुंचने के लिए पर्यटकों को कठिन ट्रैकिंग करनी पड़ती है, लेकिन ऊपर पहुंचकर शहर का दृश्य देखने का अनुभव अद्भुत होता है।
फुननाउमा की चट्टान को लेकर कई लोककथाएं प्रचलित हैं। माना जाता है कि यहां परियां शिकार के लिए आती थीं और इस जगह की खोज फुननाउमा नाम के शख्स ने की थी। यही कारण है कि यह चट्टान फुननाउमा की चट्टान के नाम से जानी जाती है।
मिजोरम की संस्कृति का अनुभव
लुंगलेई के हरे-भरे ऊंचे पहाड़ न केवल प्रकृति प्रेमियों को आकर्षित करते हैं, बल्कि यहां का मौसम भी सुहावना रहता है। इसके अलावा, लुंगलेई में मिजोरम की संस्कृति और कल्चर की झलक भी देखने को मिलती है। गांव के लोग आज भी अपनी पारंपरिक पहचान बनाए हुए हैं। यहां ऑथेंटिक मिजोरम व्यंजन का स्वाद लेना भी पर्यटकों के लिए खास अनुभव होता है।
ट्रैकिंग और एडवेंचर के लिए उपयुक्त
लुंगलेई न केवल प्रकृति प्रेमियों, बल्कि ट्रैकिंग और एडवेंचर के शौकीनों के लिए भी बेस्ट डेस्टिनेशन है। फुननाउमा की चट्टान और खावंगलुंग अभयारण्य जैसी जगहें इसे ट्रैवल लवर्स के लिए एक परफेक्ट हाइकिंग और फोटोग्राफी स्पॉट बनाती हैं।