नई दिल्ली: द्रौपदी मुर्मू का मथुरा प्रवास गहरी आस्था और भारतीय संस्कृति की झलक के रूप में सामने आया जहां उन्होंने शनिवार को गिरिराज गोवर्धन पर्वत की लगभग 21 किलोमीटर लंबी परिक्रमा पूरी की यह परिक्रमा न केवल धार्मिक महत्व रखती है बल्कि भारतीय परंपरा में श्रद्धा और समर्पण का प्रतीक भी मानी जाती है राष्ट्रपति ने पूरे मार्ग में भक्तिभाव के साथ यात्रा की और इस दौरान आम श्रद्धालुओं के बीच विशेष उत्साह देखने को मिला
परिक्रमा के बाद राष्ट्रपति दान घाटी मंदिर पहुंचीं जहां उन्होंने विधिवत पूजा अर्चना की इस दौरान उनके साथ आनंदीबेन पटेल भी मौजूद रहीं मंदिर परिसर में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे लेकिन इसके बावजूद वातावरण पूरी तरह श्रद्धा और भक्ति से ओतप्रोत रहा
राष्ट्रपति का यह दौरा तीन दिनों का है जिसमें उन्होंने आध्यात्मिक स्थलों का भ्रमण कर भारतीय संस्कृति की गहराई को अनुभव किया शुक्रवार को वे केली कुंज आश्रम पहुंचीं जहां उन्होंने संत प्रेमानंद महाराज के दर्शन किए और उनका सत्संग सुना इस दौरान राष्ट्रपति ने संत से एकांत में संवाद भी किया जिसमें अध्यात्म सेवा और जनकल्याण जैसे विषयों पर चर्चा हुई इस मुलाकात ने उनके प्रवास को और भी विशेष बना दिया राष्ट्रपति ने संत प्रेमानंद के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि संत समाज देश की सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है
इससे पहले गुरुवार को राष्ट्रपति प्रेम मंदिर पहुंचीं जहां उन्होंने राधा कृष्ण के दर्शन कर पूजा अर्चना की मंदिर का भव्य वातावरण और लेजर शो उन्हें बेहद आकर्षक लगा उन्होंने इसकी सराहना भी की मंदिर परिसर में उनकी सुरक्षा को लेकर विशेष प्रबंध किए गए थे राष्ट्रपति ने मंदिर परिसर का भ्रमण करते हुए गर्भगृह के सामने पहुंचकर दिव्य युगल विग्रह के दर्शन किए और विधिपूर्वक पूजा संपन्न की
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का यह मथुरा प्रवास केवल एक औपचारिक यात्रा नहीं बल्कि भारतीय आध्यात्मिक परंपरा से उनका गहरा जुड़ाव दर्शाता है उनके इस दौरे ने यह संदेश दिया कि देश की सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत आज भी उतनी ही जीवंत और प्रेरणादायक है जितनी सदियों पहले थी