‘टैक्स वर्ष’ समाप्त हो जाएगा
नए सिस्टम में सबसे बड़ा बदलाव यह है कि अब ‘फाइनेंशियल ईयर’ और ‘एसेसमेंट ईयर’ की जगह सिर्फ एक ही “टैक्स ईयर” होगा। इस टैक्स रिटर्न की प्रक्रिया आसान होगी और लोगों को अलग-अलग टर्म सिग्नल की जरूरत नहीं होगी।
साथ ही, रिटर्न्स फाइलिंग की नई समयसीमा भी तय कर दी गई है
सामान्य करदाता: 31 जुलाई
व्यवसाय/प्रोफेशन: 31 अगस्त
इंजेक्शन केस: 31 अक्टूबर (विशेष मामला 30 नवंबर तक)
अब कर वर्ष समाप्त होने के 12 महीने बाद तक संवैधानिक रिटर्न का भी भुगतान किया जा रहा है।
एचआरए और नई पीढ़ी पर ध्यान
हाउस रेंटलाउंस (एचआरए) को लेकर नियम सख्त किए गए हैं। अब छूट पाने के लिए मकान मालिक और किरायेदार के बिजनेस की जानकारी देना जरूरी होगा।
राहत की बात यह है कि मुंबई, दिल्ली, कोलकाता, चेन्नई के साथ अब रेजिडेंट, पुणे, पुणे और सुपरमार्केट जैसे शहरों में रहने वालों को 50% तक HRA की छूट मिलेगी। अन्य शहरों में यह सीमा 40% ही रहेगी।
यदि एलएलसी व्यवसाय 1 लाख रुपये से अधिक है तो मकान मालिक के लिए पैन कार्ड अनिवार्य होगा।
जॉबपेशा को राहत: परक्विजिट और अलाउंस में बदलाव
होम होम (परक्विजिट) के टैक्स वैल्यू में कटौती की गई है, जिससे कर्मचारियों को दी गई कंपनी को छूट मिल जाएगी।
बड़ा शहर: 10% दर
मध्यम शहर: 7.5%
छोटा शहर: 5%
कंपनी की कार पर टैक्स भी तय किया गया है:
1.6 लीटर तक: ₹5,000/माह
इससे अधिक: ₹7,000/माह
ड्राइवर होने पर: ₹3,000 अतिरिक्त
इसके अलावा-
फ़ार्सी: ₹200 प्रति मील (पहले ₹50)
उपहार/वाउचर: ₹15,000 तक कर-मुक्त
शिक्षा अलाउंस: ₹3,000/माह (2 बच्चे तक)
कॉर्पोरेट अलाउंस: ₹9,000/मह
बड़ी राहत के लिए
नए के तहत 10 करोड़ रुपये तक के टर्नओवर वाले को विस्तृत विवरण पुस्तिका और रेटिंग से छूट दी जा सकती है (कुछ प्रतिशत के साथ)। इससे छोटे बच्चों का सामान खर्च कम होगा और बिजनेस करना आसान होगा।
नवजात शिशु के लिए साफ नियम
अब यह साफ हो गया है कि किसी निवेश की अवधि कितनी होगी। विशेष रूप से कन्वर्टिबल नताशा (जैसे बॉन्ड से शेयर) में पुराने स्टॉक अवधि भी जोड़ी जाएगी। इससे शॉर्ट टर्म और लार्गे टर्म कैपिटल को हासिल करना आसान होगा। नए सिस्टम को कम करना, जगह देना और टैक्सपेयर्स को राहत की दिशा में बड़ा कदम देना है। जहां कुछ नियम सख्त किए गए हैं, वहीं कई जगहों पर राहत भी दी गई है, जिससे टैक्सिंग और स्टाफ स्टाफ आसान हो जाएगा।