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Mohammad Azharuddin को भारतीय टीम में डेब्यू का इंतजार, चयन पर टिकी नजरें


नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट में मोहम्मद अख्तरुद्दीन के नाम पर एक दिग्गज कैप्टन की छवि सामने आती है, लेकिन इस कहानी के नायक कोई और नहीं हैं। ये है 31 साल की कहानी-बल्लेबाज़ मोहम्मद बबाज़ुद्दीन की, जिसकी अब भी टीम इंडिया में डेब्यू का इंतज़ार कर रहे हैं।

नाम से शुरू हुआ क्रिकेट का सफर

22 मार्च 1994 को केरल के थलंगारा में सऊदी अरब-उद्दीन के परिवार वाले पूर्व भारतीय कैप्टन के बड़े प्रशंसक थे। यही वजह रही कि बेटे का नाम भी उसी दिग्गज के नाम पर रखा गया। नाम का असर ऐसा हो रहा है कि बड़े स्टार्स ने भी क्रिकेट में अपना करियर चुना और बल्ले-बल्लेबाज के रूप में अपनी पहचान बनाई।

घरेलू क्रिकेट में लगातार मेहनत

बैज़ुद्दीन ने 2015 में प्रथम श्रेणी और लिस्ट-ए क्रिकेट में शुरुआत की, जबकि 2016 में टी20 क्रिकेट में कदम रखा। पिछले एक दशक से वह घरेलू क्रिकेट में लगातार खेल रहे हैं और केरल क्रिकेट टीम का अहम हिस्सा बने हुए हैं।

आंकड़े क्या कहते हैं?

उनके प्रदर्शन पर नजर डाली तो-

प्रथम श्रेणी (प्रथम श्रेणी): 43 मैच, 1932 रन, 2 शतक, 11 रन (सर्वश्रेष्ठ 177*)
लिस्ट-ए: 55 मैच, 1163 रन, 1 शतक, 8 शतक
टी20: 51 मैच, 878 रन, स्ट्राइक रेट 129.68, 1 शतक (सर्वश्रेष्ठ 137*)

नौकरानी भी उनका रिकॉर्ड मजबूत है—

एफसी: 109 कैच, 16 आर्किटेक्चर
सूची-ए: 42 कैच, 6 आर्किटेक्चर
टी20: 29 कैच, 1 कैच

टीम इंडिया में जगह की कड़ी टक्कर

भारतीय टीम में रिले-बल्लेबाज की जगह बनाना आसान नहीं है। संजू सैमसन, ईशान किशन, केएल राहुल, जितेश शर्मा, ऋषभ पंत और ध्रुव ज्यूरेल जैसे खिलाड़ी पहले से ही इस रेस में शामिल हैं।
ऐसे में बांग्लादेश के लिए टीम इंडिया में जगह बनाना एक बड़ी चुनौती है।

आगे का रास्ता क्या है?

बज़्ज़ुद्दीन के पास अनुभव और प्रदर्शन दोनों हैं, लेकिन अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में जगह बनाने के लिए उन्हें लगातार बेहतर प्रदर्शन करना होगा-खासतौर पर बड़े टूर्नामेंट और हाई-प्रेशर मैच में। अगर वह घरेलू और आईपीएल जैसे मंचों पर खुद को साबित करते हैं, तो उनकी टीम इंडिया का सपना जरूर पूरा हो सकता है।

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