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पश्चिम एशिया तनाव के बीच पीएम मोदी ने ईरान से की अहम चर्चा शांति का संदेश

नई दिल्ली: भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन से फोन पर बातचीत की और उन्हें ईद तथा नवरोज के अवसर पर शुभकामनाएं दीं यह बातचीत ऐसे समय में हुई है जब अमेरिका और इजरायल के साथ ईरान के बीच संघर्ष लगातार जारी है

प्रधानमंत्री ने अपनी बातचीत में पश्चिम एशिया में शांति स्थिरता और समृद्धि की उम्मीद जताई उन्होंने कहा कि ऐसे पावन अवसर आपसी समझ और सहयोग को बढ़ाने का माध्यम बन सकते हैं और क्षेत्र में सकारात्मक माहौल तैयार कर सकते हैं

पीएम मोदी ने बातचीत के दौरान इस बात पर भी चिंता व्यक्त की कि क्षेत्र में महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर पर हो रहे हमले न केवल क्षेत्रीय स्थिरता को प्रभावित कर रहे हैं बल्कि वैश्विक सप्लाई चेन को भी बाधित कर सकते हैं उन्होंने ऐसे कदमों की निंदा करते हुए सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की

समुद्री मार्गों की सुरक्षा पर जोर देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के लिए समुद्री रास्तों का सुरक्षित और निर्बाध रहना बेहद जरूरी है भारत ने इस दौरान ईरान का आभार भी जताया कि वह वहां रह रहे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा का ध्यान रख रहा है

इससे पहले भी दोनों नेताओं के बीच 12 मार्च को बातचीत हुई थी जिसमें क्षेत्र में बढ़ते तनाव और उसके वैश्विक प्रभावों पर चर्चा की गई थी उस समय भी प्रधानमंत्री ने आवश्यक वस्तुओं और ऊर्जा की निर्बाध आपूर्ति की आवश्यकता पर जोर दिया था और चेतावनी दी थी कि किसी भी तरह की रुकावट भारत और पूरे क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकती है

भारत लगातार इस पूरे संकट के दौरान “डायलॉग और डिप्लोमेसी” की नीति पर जोर दे रहा है प्रधानमंत्री मोदी ने हाल ही में कई देशों के नेताओं से बातचीत कर शांति की पहल को आगे बढ़ाया है उन्होंने कुवैत के क्राउन प्रिंस ओमान के सुल्तान फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों मलेशिया के प्रधानमंत्री और कतर के अमीर से भी बातचीत की थी

इन सभी बातचीतों में भारत का संदेश एक ही रहा है कि किसी भी विवाद का समाधान संवाद और कूटनीति के जरिए ही संभव है प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि बातचीत और सहयोग ही स्थायी शांति का सबसे प्रभावी रास्ता है

वर्तमान में ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच जारी संघर्ष के कारण वैश्विक स्तर पर ऊर्जा संकट और व्यापार बाधित होने की आशंका बढ़ गई है ऐसे में भारत का यह कूटनीतिक प्रयास न केवल क्षेत्रीय बल्कि वैश्विक स्थिरता के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है

प्रधानमंत्री मोदी की यह बातचीत शांति संवाद और सहयोग पर आधारित भारत की विदेश नीति को दर्शाती है जो मौजूदा वैश्विक तनाव के बीच संतुलन और स्थिरता बनाए रखने की दिशा में अहम भूमिका निभा रही है

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