नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में इजराइल, ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे संघर्ष का असर अब दुनिया भर में महसूस होने लगा है। पहले लोगों की चिंता पेट्रोल और गैस की बढ़ती कीमतों को लेकर थी, लेकिन अब स्मार्टफोन, लैपटॉप और कारों की कीमतें भी बढ़ सकती हैं।
पर्दे के पीछे: हीलियम और ब्रोमीन
स्मार्टफोन और अन्य गैजेट्स में इस्तेमाल होने वाली सेमीकंडक्टर चिप्स के निर्माण में कच्चा माल महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। चिप बनाने में हीलियम का उपयोग कूलिंग और लेजर सिस्टम के लिए किया जाता है। दुनिया की एक-तिहाई हीलियम सप्लाई अकेले कतर से आती है।
इसके अलावा, चिप की पैकेजिंग के लिए ब्रोमीन जरूरी है, जो डेड सी क्षेत्र इजराइल और जॉर्डन से आता है। चिप की सफाई में प्रयुक्त सल्फ्यूरिक एसिड का लगभग 40% हिस्सा भी इसी क्षेत्र से ता है। युद्ध के कारण इन सामग्रियों की सप्लाई प्रभावित हो सकती है।
स्मार्टफोन और गैजेट्स की कीमतें बढ़ने का खतरा
चिप्स बनाने में बिजली का ज्यादा इस्तेमाल होता है। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों, महंगी ढुलाई और इंश्योरेंस प्रीमियम की वजह से चिप की लागत 20-30% तक बढ़ सकती है। अगर युद्ध 8 हफ्ते से ज्यादा चलता है, तो अमेरिका की दिग्गज चिप कंपनी Nvidia की AI चिप सप्लाई और ऑटोमोबाइल सेक्टर प्रभावित होंगे। इसका सीधा असर स्मार्टफोन और अन्य गैजेट्स की कीमतों पर पड़ सकता है।
भारत पर क्या होगा असर
भारत अभी अपनी सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री खड़ी कर रहा है। कच्चे माल की बढ़ती कीमतें नए प्रोजेक्ट्स के बजट पर दबाव डाल सकती हैं। वहीं विशेषज्ञों का मानना है कि यह भारत के लिए अवसर भी है। अब भारत को केवल चिप बनाने पर नहीं बल्कि चिप में इस्तेमाल होने वाले केमिकल्स और गैसेस के घरेलू उत्पादन पर भी ध्यान देना होगा।