राही अनिल बर्वे ने इस फिल्म को बनाने के पीछे के अपने संघर्ष और उद्देश्य को सोशल मीडिया पर विस्तार से साझा किया है। उन्होंने बताया कि यह फिल्म एक प्रयोग थी—यह देखने के लिए कि क्या कोई अकेला फिल्ममेकर बिना किसी टीम या फंडिंग के एक पूरी फीचर लेंथ फिल्म बना सकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे चाहते तो लोग हायर कर सकते थे और बेहतर विजुअल्स बनवा सकते थे, लेकिन तब यह प्रयोग विफल हो जाता। उनके अनुसार, एक बेहतरीन फिल्म बनाने के लिए महंगे कैमरों से ज्यादा अच्छी लेखन क्षमता, गहरी कल्पनाशीलता, एक बेसिक लैपटॉप और ढेर सारे धैर्य की जरूरत होती है। उन्होंने फोटोशॉप और प्रीमियर जैसे बेसिक टूल्स का उपयोग कर ‘मन पिशाच’ को वह डरावना स्वरूप दिया है, जिसे देखकर दर्शक दंग रह गए हैं।
फिल्म ‘मन पिशाच’ के प्लॉट की बात करें, तो यह 1 घंटे 20 मिनट की एक ऐसी कहानी है जो आपको भीतर तक झकझोर देगी। कहानी एक पुरातत्व अधिकारी (Archaeology Officer) के इर्द-गिर्द घूमती है, जो अपने एक प्रोजेक्ट के सिलसिले में एक बेहद रहस्यमयी गांव पहुँचता है। उस गांव के नियम और वहां रहने वाले लोग सामान्य नहीं हैं। जैसे-जैसे फिल्म आगे बढ़ती है, अधिकारी के साथ घटने वाली अजीबोगरीब घटनाएँ दर्शक को बेचैन करने लगती हैं। क्या वह उस शापित गांव से सही-सलामत बाहर निकल पाएगा? इसी सस्पेंस के इर्द-गिर्द राही ने एक डरावना जाल बुना है। फिल्म के विजुअल्स और बैकग्राउंड स्कोर इतने प्रभावी हैं कि विश्वास करना मुश्किल होता है कि इसे ज़ीरो बजट में बनाया गया है।
सोशल मीडिया और यूट्यूब पर ‘मन पिशाच’ को जबरदस्त प्रतिक्रिया मिल रही है। यूजर्स राही अनिल बर्वे के इस साहस और प्रतिभा की सराहना कर रहे हैं। दर्शकों का कहना है कि राही जैसे टैलेंट को पहचानना इंडस्ट्री के लिए बेहद जरूरी है। सबसे अच्छी बात यह है कि इस फिल्म को देखने के लिए दर्शकों को एक भी पैसा खर्च करने की जरूरत नहीं है; यह फिल्म राही अनिल बर्वे के आधिकारिक यूट्यूब चैनल पर पूरी तरह से मुफ्त उपलब्ध है। अगर आप भी हॉरर फिल्मों के शौकीन हैं और ‘तुम्बाड’ जैसी कलाकारी के कायल हैं, तो ‘मन पिशाच’ आपके लिए एक मस्ट-वॉच फिल्म है।