Mahakaushal Times

महिलाओं की नींद पर रिसर्च, सामने आया ‘स्लीप जेंडर गैप’ का सच


नई दिल्ली बायबैक द्वारा किए गए कई शोधों में एक दिलचस्प लेकिन अनोखा तथ्य सामने आया है- महिलाओं और पुरुषों की नींद का साफ मतलब है। इस अंतर को जेंडर स्लीप गैप कहा जाता है। यह केवल सोने के समय का फर्क नहीं है, बल्कि नींद की गुणवत्ता, गहराई और मानसिक प्रभावों से भी फर्क पड़ता है।

मातृभाषा की नींद पर गहरा असर
एक अध्ययन के अनुसार, 45 साल से कम उम्र की केवल 48% माताएं ही प्रतिदिन 7 घंटे की नींद ले कर बेरोजगार हैं, जबकि बिना बच्चों वाली 62% महिलाएं पूरी तरह से सोती हैं। इससे यह स्पष्ट होता है कि देश की महिलाओं की नींद सबसे ज्यादा प्रभावित होती है। बच्चों की देखभाल, रात में बार-बार उठना और वजन का बोझ महिलाओं की नींद को बाधित करता है।

ग्लोबल रिपोर्ट में भी आई सच्चाई सामने
2025 में स्लीप साइकल की एक ग्लोबल रिपोर्ट में पाया गया कि केवल 57% महिलाएं ही सामान्य मूड के साथ जागती हैं, जो पुरुषों के लिए कम है। यह संकेत बताता है कि महिलाओं की नींद केवल कम होती है, बल्कि उनकी गुणवत्ता भी प्रभावित होती है।

सबसे बड़ी वजह
महिलाओं के जीवन में ऐसे कई चरण आते हैं, जहां मासिक धर्म, गर्भावस्था और रजोनिवृत्ति जैसे परिवर्तन होते हैं। ये बदलाव नींद के पैटर्न को प्रभावित करते हैं। नींद का बार-बार टूटना और गहरी नींद की कमी महिलाओं में आम समस्या बन जाती है, जिससे शरीर और दिमाग को पूरा आराम नहीं मिलता।

सामाजिक दबाव और जिम्मेदारियाँ भी जिम्मेदार
केवल जैविक कारण ही नहीं, बल्कि सामाजिक कारण भी ये ‘जेंडर स्लीप गैप’ हैं। घर और काम के बीच संतुलन, परिवार की जिम्मेदारी, बच्चों की देखभाल और मानसिक तनाव, महिलाओं की नींद पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

महिलाओं को अधिक नींद क्यों आती है?
विशेषज्ञों के अनुसार, महिलाएं अधिक से अधिक मल्टीटास्किंग करती हैं और वैज्ञानिक रूप से भी अधिक सक्रिय रहती हैं। इससे उनके दिमाग को आराम की अधिक आवश्यकता होती है। लेकिन जब इसकी बिल्कुल जरूरत नहीं है, तो इसका असर उनके शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ने लगता है।

स्वास्थ्य पर पड़ सकता है गंभीर असर
महिलाओं में लगातार नींद की कमी से थकान, चिड़चिड़ापन, तनाव और अनिद्रा की समस्या हो सकती है। इसके अलावा हृदय रोग और मेटाबोलिक विकार का खतरा भी बढ़ जाता है।
विशेषज्ञों का मानना ​​है कि अच्छी नींद केवल आराम नहीं, बल्कि स्वस्थ जीवन की बुनियाद है।

जागरूकता ही समाधान
‘जेंडर स्लीप गैप’ को डाउनलोड करें और इसे कम करने के लिए जागरूकता बढ़ाना बेहद जरूरी है। परिवार और समाज को भी इस दिशा में प्रेरित किया जाएगा, ताकि महिलाओं को पर्याप्त सुविधा और बेहतर स्वास्थ्य मिल सके।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

MADHYA PRADESH WEATHER

आपके शहर की तथ्यपूर्ण खबरें अब आपके मोबाइल पर