ओसामा बिन लादेन के खिलाफ ऑपरेशन की रणनीति में अहम भूमिका निभा चुके पैनेटा ने एक इंटरव्यू में कहा कि अमेरिका ने खुद को ऐसे मोड़ पर खड़ा कर लिया है जहां से निकलना आसान नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि ट्रंप प्रशासन ने ईरान पर हमला करने से पहले न तो हालात का सही आकलन किया और न ही दीर्घकालिक रणनीति तैयार की।
पैनेटा के अनुसार यह पहली बार नहीं है जब अमेरिका में ईरान को लेकर चर्चा हुई हो। उन्होंने कहा कि पहले के सभी प्रशासन इस मुद्दे की जटिलता को समझते थे और हर कदम सोच समझकर उठाते थे। लेकिन इस बार बिना पूरी तैयारी के सैन्य कार्रवाई कर दी गई जो एक बड़ी राजनीतिक और रणनीतिक चूक साबित हो रही है।
उन्होंने खास तौर परहोरमुज़ जलसंधि का जिक्र करते हुए कहा कि यह क्षेत्र वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद अहम है और यहां किसी भी तरह का संकट पूरी दुनिया को प्रभावित करता है। उनके मुताबिक अगर पहले से योजना बनाई गई होती तो इस तरह की स्थिति का अनुमान लगाकर कदम उठाए जा सकते थे।
पैनेटा ने ईरान के नेतृत्व में आए बदलाव को भी गंभीर बताया। उन्होंने कहा कि अली खामेनेई के बाद अब उनके बेटे मोजतबा खामेनेई के नेतृत्व में एक नया और ज्यादा सख्त दौर शुरू हो सकता है। उनका मानना है कि नया नेतृत्व ज्यादा आक्रामक रुख अपना सकता है और बातचीत की गुंजाइश कम हो सकती है जिससे तनाव और बढ़ेगा।
इस पूरे घटनाक्रम में नाटो सहयोगियों की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। पैनेटा ने आरोप लगाया कि ट्रंप ने अपने सहयोगी देशों को विश्वास में लिए बिना ही युद्ध का फैसला किया जो एक आत्मघाती कदम साबित हुआ। उन्होंने कहा कि आज अमेरिका उन्हीं देशों से समर्थन मांग रहा है जिन्हें पहले नजरअंदाज किया गया था।
दरअसल ट्रंप के कार्यकाल में नाटो को लेकर कई विवादित बयान सामने आए थे जिससे सहयोगी देशों के साथ रिश्तों में खटास आई। अब जब हालात गंभीर हो रहे हैं तो कई देश खुलकर समर्थन देने से हिचक रहे हैं।
कुल मिलाकर ईरान के साथ बढ़ता संघर्ष अब केवल सैन्य टकराव नहीं बल्कि कूटनीतिक और रणनीतिक परीक्षा भी बन गया है। पूर्व सीआईए प्रमुख की यह चेतावनी साफ संकेत देती है कि अगर जल्द ही ठोस रणनीति नहीं बनाई गई तो यह संकट और गहरा सकता है और इसका असर वैश्विक स्तर पर महसूस किया जाएगा।