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भोपाल नगर निगम का 3938.45 करोड़ रुपये का बजट पारित…..कोई नया टैक्स नहीं


भोपाल।
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में महापौर मालती राय ने सोमवार को नगर निगम का बजट पेश किया। इसमें शहर के विकास कार्यों के लिए 3938 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। नगर निगम ने बजट में शहरवासियों पर कोई नया टैक्स नहीं लगाया गया है।

बजट में भोपाल ‘शहर सरकार’ ने कई नए वादे भी किए है। हालांकि, पिछले दो साल से किए जा रहे 7 हेरिटेज गेट, गीता भवन बनाने जैसे वादे अब भी अधूरे हैं। एक साल में सिर्फ दो हेरिटेज गेट के लिए भोपाल-इंदौर स्टेट हाईवे और होशंगाबाद रोड पर भूमिपूजन हुआ है। मंत्री-विधायकों की आपत्ति के बाद प्रॉपर्टी या जल कर बढ़ाने की संभावना कम ही है। पिछली बार कुल 3611 करोड़ रुपये का बजट पेश किया था।

इधर, बजट में इस बार टैक्स नहीं बढ़ाया गया है, लेकिन वार्डों में परिसीमन शुल्क बढ़ाने की तैयारी है। ऐसे में कई उपभोक्ताओं पर इसका असर पड़ेगा। दोपहर 12 बजे से शाम 7.30 बजे के बीच पक्ष-विपक्ष में नोक-झोंक की स्थिति बनी। हालांकि, बहुमत के आधार पर बजट पारित कर दिया गया।

इधर, भोपाल नगर निगम के बजट ने शहर की राजनीति को गरमा दिया है। नए बजट के साथ ही पुराने बजट के क्रियान्वयन पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। नेता प्रतिपक्ष ने जहां अधूरे कामों और खर्च पर बड़ा हमला बोला है, वहीं महापौर ने विकास कार्यों के जारी रहने का दावा करते हुए आरोपों को खारिज किया है।

पुराने बजट पर विपक्ष का बड़ा आरोप नेता प्रतिपक्ष शबिस्ता जकी ने कहा कि पिछले बजट का बड़ा हिस्सा अब तक खर्च नहीं हो पाया। उनके अनुसार, कुल बजट का करीब 65% हिस्सा शेष है, जबकि केवल 45% राशि का ही उपयोग हुआ। उन्होंने आरोप लगाया कि खर्च हुई राशि में भी स्थिति चिंताजनक है। सिर्फ 10% काम ही जमीनी स्तर पर शुरू हो पाए हैं, जबकि 90% प्रोजेक्ट अब तक शुरू नहीं हुए। जकी ने इसे पुराने वादों का दोहराव बताते हुए कहा कि जिन योजनाओं पर पहले काम नहीं हुआ, उन्हीं को दोबारा बजट में शामिल कर दिया गया है।


कागजी बजट, जनता को नहीं मिल रहा लाभ

नेता प्रतिपक्ष जकी ने कहा कि बजट में कई मद ऐसे हैं, जिनमें पहले भी राशि स्वीकृत हुई, लेकिन न तो काम शुरू हुए और न ही पूरे किए गए। उनके मुताबिक, योजनाओं के नाम पर सिर्फ राशि आवंटित की जा रही है, जबकि जमीनी हकीकत में काम नजर नहीं आ रहे। उन्होंने निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि राजस्व वसूली पर ध्यान नहीं दिया जा रहा, जिससे निगम की आर्थिक स्थिति कमजोर हो रही है। साथ ही पार्षद निधि की फाइलें लंबे समय से टेंडर प्रक्रिया में अटकी होने का मुद्दा भी उठाया, जिससे विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं।


महापौर ने कहा- विकास कार्य जारी

वहीं महापौर मालती राय ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि नगर निगम का 3,938 करोड़ 45 लाख 28 हजार रुपये का बजट शहर के विकास और सौंदर्यीकरण को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। उन्होंने कहा कि भोपाल की पहचान को ध्यान में रखते हुए बड़ा तालाब, छोटा तालाब और शाहपुरा लेक के सौंदर्यीकरण के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं। साथ ही निगम कर्मचारियों के हित में दुर्घटना सहायता और पुरस्कार राशि बढ़ाने जैसे फैसले लिए गए हैं।


टैक्स में राहत, योजनाओं पर फोकस

महापौर ने स्पष्ट किया कि जलकर, संपत्ति कर और सीवेज कर में किसी प्रकार की बढ़ोतरी नहीं की गई है, जिससे आम नागरिकों को राहत मिलेगी। उन्होंने बताया कि पुराने वादों पर काम जारी है। विसर्जन कुंड और प्रवेश द्वार निर्माण प्रगति पर हैं, म्यूजियम के लिए जमीन की तलाश जारी है और कैंपियन ग्राउंड में छोटा स्टेडियम लगभग तैयार हो चुका है। इसके अलावा घर-घर पानी कनेक्शन योजना की प्रक्रिया जारी है और सोलर पैनल प्रोजेक्ट के जरिए निगम के खर्च को कम करने की दिशा में काम किया जा रहा है।


इस बार मेयर, अध्यक्ष-एमआईसी मेंबर के लिए फंड नहीं

भोपाल नगर निगम के इस बार के बजट में मेयर, अध्यक्ष, एमआईसी मेंबर और जोन अध्यक्ष के लिए कोई फंड नहीं रखा गया है। पिछले बजट में मेयर के लिए 10 करोड़ रुपए, अध्यक्ष के लिए पांच करोड़ रुपये और एमआईसी मेंबर के लिए एक करोड़ रुपये का प्रावधान था, लेकिन विभाग के हालिया आदेश के बाद इस बार बजट में इन फंड्स की व्यवस्था समाप्त कर दी गई है।


सदन में गोमांस को लेकर हुआ हंगामा

इससे पहले, बैठक में गोमांस को लेकर हंगामा चला। प्रश्नकाल में नेता प्रतिपक्ष शाबिस्ता जकी ने गोमांस और स्लॉटर हाउस पर पहला प्रश्न किया। इस पर एमआईसी मेंबर आरके सिंह बघेल ने जवाब दिया। इस दौरान महापौर और नेता प्रतिपक्ष के बीच नोंक-झोंक हुई। भाजपा के सीनियर पार्षद सुरेंद्र बाडिका और विलास राव घड़गे ने भी गोमांस के मुद्दे पर विरोध जताया। सभी ने जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की।

इस बीच, नईं पार्किंग व्यवस्था बनाने का प्रस्ताव, कंडम (बेकार) वाहनों को हटाने का प्रस्ताव पास किया गया। वहीं, लिगेसी वेस्ट (पुराना कचरा) हटाने का प्रस्ताव पास नहीं हो पाया। विपक्ष की नेता शबिस्ता जकी ने गोमांस का मुद्दा उठाया।

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