मंगलवार को कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में आयोजित समीक्षा बैठक में कलेक्टर ने जल गंगा संवर्धन अभियान की प्रगति की विस्तार से समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि अभियान के तहत निर्धारित लक्ष्यों को समय-सीमा में पूरा किया जाए और कार्य में तेजी लाई जाए। कलेक्टर ने कहा कि जल संरक्षण केवल एक प्रशासनिक पहल नहीं बल्कि भविष्य की पीढ़ियों के लिए संसाधनों को सुरक्षित रखने का महत्वपूर्ण दायित्व है।
उन्होंने जिले के सभी एसडीएम जनपद पंचायतों के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों और नगर निकायों के सीएमओ को निर्देश दिए कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम की स्थापना सुनिश्चित करें। साथ ही उन्होंने कहा कि जहां भी संभव हो वर्षा जल संचयन के पारंपरिक और आधुनिक दोनों तरीकों को अपनाया जाए ताकि अधिकतम जल संरक्षण किया जा सके।
कलेक्टर ने यह भी स्पष्ट किया कि शासकीय भवनों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग की व्यवस्था केवल औपचारिकता न रह जाए बल्कि इसे प्रभावी तरीके से लागू किया जाए। इसके लिए नियमित मॉनिटरिंग और निरीक्षण की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। उन्होंने कहा कि जिन विभागों या अधिकारियों द्वारा इस कार्य में लापरवाही बरती जाएगी उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
बैठक में जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत किए जा रहे कार्यों की प्रगति उपलब्धियों और चुनौतियों पर भी चर्चा की गई। कलेक्टर ने अधिकारियों से कहा कि वे क्षेत्र में जनभागीदारी बढ़ाने के प्रयास करें और लोगों को जल संरक्षण के प्रति जागरूक बनाएं। उन्होंने कहा कि जल संकट की समस्या को केवल सरकारी प्रयासों से नहीं बल्कि सामूहिक सहभागिता से ही प्रभावी रूप से हल किया जा सकता है।
उन्होंने ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में जल संरक्षण के लिए नवाचारों को अपनाने पर भी जोर दिया। वर्षा जल संचयन तालाबों का पुनर्जीवन जल स्रोतों का संरक्षण और भूजल स्तर को बढ़ाने के लिए किए जा रहे प्रयासों को और अधिक प्रभावी बनाने के निर्देश दिए गए।
कलेक्टर ने कहा कि यदि समय रहते जल संरक्षण के लिए ठोस कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले समय में जल संकट और गंभीर हो सकता है। इसलिए यह आवश्यक है कि सभी विभाग मिलकर इस दिशा में समन्वित प्रयास करें।
इस सख्त रुख के साथ बैतूल जिला प्रशासन ने स्पष्ट संदेश दिया है कि जल संरक्षण को प्राथमिकता दी जाएगी और इसमें किसी भी प्रकार की ढिलाई को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यह पहल न केवल वर्तमान जरूरतों को पूरा करेगी बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए जल संसाधनों को सुरक्षित रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।