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ईरान युद्ध से भारत में बीयर की किल्लत जैसे हालात, कई ब्रांड हो सकते हैं महंगे

तेहरान। ईरान और इजरायल-अमेरिका के बीच जारी युद्ध का असर अब भारत के शराब उद्योग पर भी दिखने लगा है। अब आशंका जताई जा रही है कि कई बड़े ब्रांड्स की किल्लत भारत में हो सकती है। कहा जा रहा है कि इसके चलते बीयर महंगी भी हो सकती हैं।
वैश्विक बीयर कंपनियों हाइनेकेन, एबी इनबेव और कार्ल्सबर्ग ने भारत में बीयर की सप्लाई रुकने और कीमतों में बढ़ोतरी की चेतावनी दी है।
संकट के मुख्य कारण

कांच और एल्युमीनियम की कमी: युद्ध के कारण प्राकृतिक गैस की सप्लाई बाधित हुई है, जिससे कांच की बोतलें बनाने वाली भट्टियां बंद हो रही हैं। बोतलों की कीमतों में 20% तक का उछाल आया है। वहीं, शिपिंग में देरी से कैन बनाने के लिए जरूरी एल्युमीनियम का आयात भी प्रभावित हुआ है।

गैस आपूर्ति पर निर्भरता: भारत अपनी जरूरत की 40% गैस कतर से मंगवाता है। ईरानी हमलों के कारण कतर की निर्यात क्षमता पर असर पड़ा है, जिससे भारतीय मैन्युफैक्चरर्स के लिए गैस की भारी किल्लत हो गई है।

पैकेजिंग लागत: बीयर की बोतलों के अलावा पेपर कार्टन (गत्ते) के दाम दोगुने हो गए हैं और लेबल-टेप जैसी सामग्रियों की लागत भी बढ़ गई है।

कीमतों में 15% तक बढ़ोतरी की मांग

‘ब्रूअर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया’ के महानिदेशक विनोद गिरी के अनुसार, उत्पादन लागत इतनी बढ़ गई है कि अब काम जारी रखना मुश्किल हो रहा है। एसोसिएशन ने राज्य सरकारों से बीयर की कीमतों में 12% से 15% तक की बढ़ोतरी की अनुमति मांगी है।

भारत में गर्मियों का सीजन शुरू हो रहा है, जो बीयर की बिक्री का पीक समय होता है। यदि संकट जल्द नहीं सुलझा, तो इस साल शादियों और गर्मियों के सीजन में बीयर की भारी कमी देखने को मिल सकती है।
राष्ट्रपति ट्रंप ने पीएम मोदी को लगाया फोन

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ फोन पर हुई बातचीत के बाद कहा कि भारत पश्चिम एशिया में जल्द से जल्द तनाव कम करने, शांति बहाल करने और वैश्विक व्यापार के लिए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खुला रखने का समर्थन करता है। पश्चिम एशिया में 28 फरवरी को संघर्ष शुरू होने के बाद से दोनों नेताओं के बीच यह पहली बातचीत है।

इस बातचीत में प्रधानमंत्री मोदी ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खुला, सुरक्षित और सुलभ बनाए रखने के महत्व पर जोर दिया, और कहा कि यह वैश्विक शांति, स्थिरता एवं आर्थिक खुशहाली के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

पीटीआई भाषा के अनुसार, पूरे घटनाक्रम की जानकारी रखने वाले लोगों ने बताया कि मोदी और ट्रंप के बीच फोन कॉल पर हुई बातचीत को भारत की उस पहल के संदर्भ में देखा जाना चाहिए, जिसका मुख्य उद्देश्य जल्द से जल्द शत्रुता को समाप्त करना और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से ऊर्जा का आवागमन सुनिश्चित करना है। उन्होंने यह भी बताया कि यदि जलमार्ग की नाकाबंदी जारी रहती है तो देश की खाद्य, ईंधन और उर्वरक सुरक्षा पर क्या प्रभाव पड़ेगा।

उन्होंने कहा कि भारत इस संघर्ष को जल्द से जल्द समाप्त करना चाहता है। साथ ही यह भी कहा कि शत्रुता के भयावह परिणाम होने वाले हैं क्योंकि यह जल्द ही अफ्रीका में खाद्य सुरक्षा के साथ-साथ उर्वरक आपूर्ति को भी प्रभावित कर सकता है।

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