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जुलाई से नया नियम लागू: मिस-सेलिंग पर RBI का शिकंजा, ग्राहकों को मिलेगा फायदा


नई दिल्ली भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने देश में बैंकिंग और वित्तीय सेवाओं से जुड़ी हल्दी कंपनियों के बीच ‘मिस-सेलिंग’ पर सहमति की तैयारी की है। प्रस्तावित नए नियम जुलाई 2026 से लागू हो सकते हैं, जैसे मुख्य उद्देश्य निवेशकों को गलत या बुनियादी जानकारी हासिल करने वाले वित्तीय योजनाओं पर रोक लगाना है। इन प्रावधानों के लागू होने के बाद यदि किसी ग्राहक को पता चलता है कि उसके साथ धोखे से कोई उत्पाद निकाला गया है, तो वह शिकायत करेगा और जांच के मामले में सही पाए जाने पर बैंक को पूरा पैसा लौटाना होगा।

मिस-सेलिंग क्या है? आसान भाषा में

‘मिस-सेलिंग’ का मतलब ग्राहक की ज़रूरत, प्रोफ़ाइल या समझ के आधार पर वित्तीय उत्पाद युवाओं के लिए गलत जानकारी है। ऐसा अक्सर होता है जब बैंक कर्मचारी अपने निवेशकों या इंसेंटिव के दबाव में निवेशकों को बीमा, फंड फंड या अन्य थर्ड पार्टी उत्पाद बेचते हैं। कई बार रिस्क, लॉक-इन होम या रिटर्न से जुड़ी अहम जानकारी छिपा ली जाती है।

उदाहरण के तौर पर पर-

एफडी ने ग्राहकों को यूलिप से “सेफ इन्वेस्टमेंट” में शामिल किया
लोन के साथ इंश्योरेंश जॉइंट देना
बुजुर्ग व्यक्ति को लंबी अवधि की स्थायित्व थमा देना

ये सभी मिस-सेलिंग के क्लासिक केस माने जाते हैं।

जुलाई 2026 से क्या बदला जाएगा?

भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा प्रस्तावित पदासीन पदों के लिए आवेदकों के लिए स्पष्ट और बंधनकारी प्रणाली बनाई जाएगी। यदि ग्राहक को समय सीमा निर्धारित नहीं है, तो वह 30 दिनों के भीतर शिकायत दर्ज कर सकता है।

अगर जांच में मिस-सेलिंग साबित होती है, तो-

उत्पादों को रद्द करना होगा
ग्राहक को पूरी रकम लौटानी होगी
हुए नुकसान की खोज भी करनी होगी
इसके अलावा, बैंकों को अपने कर्मचारियों को ऐसे उत्पाद बेचने के लिए गलत प्रोत्साहन देने से भी रोकना होगा।

सिस्टम से सुपरमार्केट प्लांट

नए स्नातक के अधीन संस्थानों को हर स्टायर्ड पार्टी उत्पाद की बिक्री के लिए 30 दिन के अंदर ग्राहक से अंतिम संस्कार लेना अनिवार्य होगा। इस डेटा के आधार पर हर 6 महीने में रिपोर्ट तैयार की जाएगी, जिसमें सिस्टम में टुकड़े और टुकड़े होंगे।

बदनसीब की वजह

पिछले कुछ वर्षों में बैंकों की ऑर्थोडॉक्स पार्टी के उत्पादों की कमाई तेजी से बढ़ी है। उदाहरण के तौर पर भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) ने वित्त वर्ष 2024-25 में इस माध्यम से हजारों करोड़ रुपये का कमीशन कमाया। इसी प्रवृत्ति को देखते हुए सरकार और जनरल जनरल को अब सबसे ज्यादा छूट दी गई है। हाल ही में निर्मला सीतारमण ने भी बैंकों को अपने मूल कार्य-जमा और कर्ज-पर ध्यान देने की सलाह दी थी।

वेबसाइट के लिए क्या जरूरी है?

ऐसे विंटेज को भी रहने की ज़रूरत है। किसी भी वित्तीय उत्पाद के रिकॉर्ड्स से पहले—

सभी दस्तावेज़ ध्यान से पढ़ें
जोखिम और ऑटोमोबाइल को मंजूरी
केवल मूल्यवान वादों पर भरोसा न करें
आवश्यकता है लिखित जानकारी लेने की

यदि आपको लगता है कि आपके साथ कुछ गलत हुआ है, तो आप अपने बैंक की वेबसाइट या संबंधित लोकपाल के पास शिकायत दर्ज कर सकते हैं।

वाद-विवाद के हित में बड़ा कदम

भारतीय रिज़र्व बैंक का यह कदम नेटवर्क सिस्टम में निवेशकों की रक्षा करने की दिशा को बढ़ाना और महत्व देना माना जा रहा है। इससे मिस-सेलिंग जैसी समस्याओं पर काफी हद तक लगाम लगने की उम्मीद है।

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