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ऊर्जा सेक्टर में बूस्ट: Coal India का 3,300 करोड़ का निवेश, 8 नई वाशरी स्थापित


नई दिल्ली। देश की प्रमुख कोयला कंपनी Coal India Limited ने कोकिंग कोल की गुणवत्ता सुधारने और आयात पर निर्भरता घटाने के लिए बड़ा निवेश ऐलान किया है। कंपनी करीब 3,300 करोड़ रुपये खर्च कर 8 नई कोकिंग कोल वॉशरियां स्थापित करेगी। इस कदम को भारत के स्टील सेक्टर को मजबूत करने और घरेलू उत्पादन बढ़ाने की दिशा में अहम माना जा रहा है। कंपनी का लक्ष्य है कि इन वॉशरियों को 2029-30 तक चालू कर दिया जाए।

क्षमता में होगा बड़ा इजाफा, दोगुनी से ज्यादा बढ़ेगी ताकत

नई वॉशरियों की कुल क्षमता 21.5 मिलियन टन प्रति वर्ष (MTY) होगी। फिलहाल Coal India Limited के पास 10 वॉशरियों का नेटवर्क है, जिसकी कुल क्षमता 18.35 MTY है। यानी आने वाले वर्षों में कंपनी अपनी वॉशिंग क्षमता को दोगुने से भी अधिक बढ़ा देगी। इससे न सिर्फ उत्पादन में वृद्धि होगी, बल्कि कोयले की गुणवत्ता में भी सुधार आएगा।

क्या होती है कोकिंग कोल वॉशरी?

कोकिंग कोल वॉशरी एक ऐसा संयंत्र होता है, जहां कच्चे कोयले से राख, मिट्टी और पत्थर जैसी अशुद्धियों को हटाया जाता है। इससे कोयले की गुणवत्ता बेहतर होती है और वह स्टील उत्पादन के लिए उपयुक्त बन जाता है। भारत में कोयले में राख की मात्रा 25% से 45% तक होती है, जो इसकी गुणवत्ता को प्रभावित करती है। ऐसे में वॉशरियों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है।

कहां लगेंगी नई वॉशरियां?

नई बनने वाली 8 वॉशरियों में से-

5 वॉशरियां (14.5 MTY) Central Coalfields Limited के तहत स्थापित की जाएंगी
3 वॉशरियां (7 MTY) Bharat Coking Coal Limited के अंतर्गत विकसित होंगी

इसके अलावा कंपनी मौजूदा वॉशरियों के आधुनिकीकरण और नवीनीकरण पर भी करीब 300 करोड़ रुपये खर्च करेगी, जिससे उनकी दक्षता और उत्पादन क्षमता बढ़ाई जा सके।

पुरानी परिसंपत्तियों का मुद्रीकरण और निजी साझेदारी

Coal India Limited राष्ट्रीय मुद्रीकरण पाइपलाइन के तहत अपनी पुरानी वॉशरियों का भी उपयोग बढ़ाने की योजना बना रही है। कुछ बंद पड़ी इकाइयों को भी इस प्रक्रिया में शामिल किया जाएगा। इसके साथ ही कंपनी Tata Steel जैसी निजी कंपनियों के साथ मिलकर तकनीकी सहयोग बढ़ा रही है, ताकि वॉशिंग क्षमता और गुणवत्ता दोनों में सुधार हो सके।

आयात में कमी और विदेशी मुद्रा की बचत

भारत में उच्च गुणवत्ता वाले कोकिंग कोल की कमी के कारण भारी मात्रा में आयात करना पड़ता है, जिससे विदेशी मुद्रा पर दबाव पड़ता है। Coal India Limited की यह पहल आयात निर्भरता कम करने, लागत घटाने और घरेलू स्टील उद्योग को सस्ता व बेहतर कच्चा माल उपलब्ध कराने में मदद करेगी।

  आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम

यह निवेश न सिर्फ कोल सेक्टर बल्कि पूरे औद्योगिक ढांचे को मजबूती देगा। इससे ‘मेक इन इंडिया’ और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को भी बढ़ावा मिलेगा।

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