युवा विधायकों को जिम्मेदार नेतृत्व का संदेश
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपने संबोधन में युवा विधायकों को जिम्मेदार नेतृत्व का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि राजनीति में सफलता केवल पद पाने से नहीं, बल्कि जनता के बीच निरंतर सक्रिय रहने और उनके विश्वास को बनाए रखने से मिलती है। उन्होंने विनम्रता को जनप्रतिनिधि का सबसे बड़ा गुण बताते हुए कहा कि अपने क्षेत्र की अच्छाइयों के साथ उसकी कमियों को समझना भी जरूरी है। उन्होंने यह भी कहा कि आज पूरी दुनिया भारत की ओर देख रही है, क्योंकि देश 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने के लक्ष्य की ओर बढ़ रहा है। ऐसे समय में जनप्रतिनिधियों की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है।
लोकतंत्र की जड़ों को मजबूत करने पर जोर
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने लोकतंत्र की जड़ों को मजबूत करने पर जोर देते हुए छात्र संघ चुनावों की बहाली की मांग उठाई। उन्होंने कहा कि नेतृत्व की असली शुरुआत कॉलेज जीवन से होती है, जहां युवाओं में सिस्टम को समझने और उससे सवाल करने की ऊर्जा होती है। उनके अनुसार, यदि छात्र राजनीति को प्रोत्साहन मिलेगा तो देश में लोकतंत्र और अधिक मजबूत होगा। उन्होंने यह भी कहा कि चुनाव जीतना ही सब कुछ नहीं है, बल्कि जनता के साथ दिल से जुड़ाव बनाना ज्यादा जरूरी है।
आधुनिक राजनीति में सोशल मीडिया की भूमिका
मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने आधुनिक राजनीति में सोशल मीडिया की भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया एक शक्तिशाली माध्यम है, जो सकारात्मक और नकारात्मक दोनों तरह से प्रभाव डाल सकता है। इसलिए जनप्रतिनिधियों को अपनी सोशल मीडिया टीम को जिम्मेदार और सकारात्मक बनाना चाहिए। उन्होंने सलाह दी कि आलोचनाओं से घबराने के बजाय सकारात्मक कार्यों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए, क्योंकि अंततः जनता सच्चाई को पहचानती है।
अन्य विधायकों का संबोधन
सम्मेलन में राजस्थान विधानसभा के अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने संसदीय परंपराओं और संवाद की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में विरोध होना स्वाभाविक है, लेकिन वह तार्किक और रचनात्मक होना चाहिए। उन्होंने युवा विधायकों को सलाह दी कि वे सदन में अधिक समय बिताएं, अनुभवी नेताओं के विचार सुनें और अध्ययन के आधार पर अपनी पहचान बनाएं।
विभिन्न विधायकों ने अपने-अपने अनुभव और सुझाव साझा किए। राजस्थान के विधायक गुरवीर सिंह ने खेलों के विकास पर जोर देते हुए कहा कि हर राज्य को कम से कम एक खेल को प्राथमिकता देनी चाहिए, जैसे ओडिशा ने हॉकी को अपनाया है। उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में अपने प्रयासों का जिक्र करते हुए बताया कि उन्होंने अपने क्षेत्र में कई पुस्तकालय स्थापित किए हैं, जिससे युवाओं को पढ़ाई के बेहतर अवसर मिल रहे हैं।
सतना के विधायक सिद्धार्थ कुशवाह ने लोकतंत्र की वर्तमान स्थिति पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या जनता का विश्वास आज भी राजनीतिक व्यवस्था में बना हुआ है। उन्होंने कहा कि चुनावों में बढ़ते खर्च और अनैतिक तरीकों से लोकतंत्र की गुणवत्ता पर असर पड़ रहा है। उनके अनुसार, 2047 तक देश को मजबूत बनाने के लिए राजनीतिक व्यवस्था में सुधार जरूरी है।
नेपानगर की विधायक मंजू दादू ने समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचने की जरूरत पर बल दिया। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों को अपने क्षेत्र में ऐसे लोगों की पहचान करनी चाहिए, जिन्हें सबसे ज्यादा मदद की जरूरत है, और उनके साथ संवाद बढ़ाना चाहिए। इसी तरह, चाचौड़ा की विधायक प्रियंका मीणा ने कहा कि विधायक जनता और सरकार के बीच एक सेतु का काम करता है, इसलिए उसे दोनों के बीच प्रभावी संवाद सुनिश्चित करना चाहिए।
भोपाल उत्तर के विधायक आतिफ अकील ने प्रशासनिक स्तर पर आने वाली चुनौतियों की ओर ध्यान दिलाया। उन्होंने कहा कि कई बार अधिकारी जनप्रतिनिधियों को अपेक्षित सहयोग नहीं देते, जिससे विकास कार्य प्रभावित होते हैं। वहीं, छत्तीसगढ़ की विधायक हर्षिता स्वामी बघेल ने नक्सल समस्या को लेकर कहा कि अभी इसे पूरी तरह समाप्त घोषित करना जल्दबाजी होगी।
सम्मेलन का समापन पारंपरिक लोक नृत्य और समूह फोटो के साथ हुआ। दो दिन तक चलने वाले इस कार्यक्रम में कुल पांच सत्र आयोजित किए जा रहे हैं, जिनमें लोकतंत्र में नागरिकों की भागीदारी बढ़ाने और ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य को हासिल करने में युवा विधायकों की भूमिका पर चर्चा हो रही है। 31 मार्च को दूसरे दिन ‘विकसित भारत 2047: युवा विधायकों के दायित्व एवं चुनौतियां’ विषय पर मंथन होगा।