सरकार ने साफ किया है कि इस योजना के तहत महिलाओं को कैश राशि नहीं दी जाएगी, बल्कि कूपन दिए जाएंगे। इन कूपन का इस्तेमाल महिलाएं अपनी ज़रूरत के घरेलू सामान खरीदने में कर सकेंगी। इसमें वाशिंग मशीन, फ्रिज, टीवी, मिक्सी जैसे रोजमर्रा के उपयोगी उपकरण शामिल हो सकते हैं। सरकार का तर्क है कि इससे महिलाओं को अपनी ज़रूरत और पसंद के अनुसार निर्णय लेने की स्वतंत्रता मिलेगी, साथ ही पैसे का सही इस्तेमाल सुनिश्चित होगा।
मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन ने इस फैसले के पीछे की सोच स्पष्ट करते हुए कहा कि अगर सीधे कैश दिया जाता है, तो वह रोजमर्रा के खर्चों में खत्म हो सकता है। लेकिन कूपन सिस्टम से महिलाएं घर के लिए टिकाऊ और उपयोगी चीजें खरीद सकेंगी। इस तरह यह योजना केवल आर्थिक मदद नहीं, बल्कि घरेलू जीवन स्तर सुधारने की दिशा में भी एक प्रयास है।
राज्य में 23 अप्रैल को होने वाले चुनाव से पहले इस घोषणा को एक चुनावी कदम माना जा रहा है। सभी राजनीतिक दल जहां अपने-अपने वादों के माध्यम से लोकसभा को लुभाने में लगे हैं, वहीं द्रविड़ मुनेत्र कड़गम का यह फैसला जरूरी पर महिला लोकसभा पर केंद्रित है। राजनीतिक विश्लेषकों का रुझान है कि यह योजना चुनावी समीकरण बदल सकती है और इसका असर वोटिंग नतीजों पर भी देखने को मिल सकता है।
पार्टी की वरिष्ठ नेता कनिमोझी करुणानिधि ने बताया कि इस घोषणापत्र को तैयार करने से पहले राज्यभर में लोगों से सुझाव लिए गए थे। उनका कहना है कि यह योजना जनता की संस्थाओं और अनुभवों पर आधारित है, न कि केवल राजनीतिक वादों पर। इस पहल से महिलाओं को घरेलू निकायों में अधिक भागीदारी और आत्मनिर्भरता मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। इससे महिलाओं की खरीदारी क्षमता जितनी और वे अपने परिवार की संपत्तियों को बेहतर तरीके से पूरा कर पाएंगी। अब देखना दिलचस्प होगा कि यह योजना चुनावी मैदान में कितना असर पड़ेगा।