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लोकसभा ने दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता (संशोधन) विधेयक को दी मंजूरी, दिवालियापन प्रक्रिया में तेज़ी


नई दिल्ली। लोकसभा ने सोमवार को दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता (संशोधन) विधेयक, 2026 को मंजूरी दे दी है। यह कदम दिवालियापन प्रक्रिया में तेजी से लाने और कंपनियों के दिवालियापन मामलों के शीघ्र निपटान के उद्देश्य से उठाया गया है।

विधि के अनुसार, किसी कंपनी के डिफॉल्ट साबित होने के बाद दिवालियापन के आवेदन को 14 दिनों के भीतर स्वीकार करने की अनिवार्य समय सीमा तय की गई है। इससे जुड़े मामलों में देरी कम होगी और समाधान प्रक्रिया तेज होगी।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बताया कि विधेयक में 12 संशोधन प्रस्तावित किए गए हैं ताकि दिवालियापन समाधान तंत्र और मजबूत हो सके। उन्होंने कहा कि आईबीसी (IBC) प्रक्रिया में देरी का मुख्य कारण व्यापक दिवालियापन है, और इस संशोधन में दंड का प्रावधान भी शामिल है ताकि प्रक्रिया के दुरुपयोग को रोका जा सके।

विधि ने सदन में स्पष्ट किया कि दिवालियापन संहिता का उद्देश्य कभी भी केवल ऋण वसूली तंत्र के रूप में काम करना नहीं था। उनका कहना था कि IBC ने बैंकिंग क्षेत्र के स्वास्थ्य में सुधार किया है और कंपनियों की क्रेडिट प्रोफाइल और कॉर्पोरेट गवर्नेंस को बेहतर बनाया है।

मंत्री ने यह भी कहा कि दिवालियापन प्रक्रिया से बाहर आने वाली कंपनियों का प्रदर्शन अच्छा रहा है, और यह ढांचा संकटग्रस्त हितधारकों का समाधान करने और समझौतों फर्मों को बचाने के लिए है, न कि सिर्फ बकाया राशि वसूलने के लिए। निर्मला वादे ने जोर देते हुए कहा, “IBC का उद्देश्य कंपनियों के उद्यम मूल्य को संरक्षित करना और वित्तीय संकट का समाधान करना है, न कि ऋण वसूली का साधन।”
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