नई दिल्ली। सरकार (Government) ने सोमवार को एक अहम जानकारी देते हुए बताया कि ऊर्जा उत्पादों से लदे और भारत (India) आ रहे 10 विदेशी झंडे वाले जहाज (10 Foreign-Flagged Ships) इस समय फारस की खाड़ी (Persian Gulf ) में फंसे हुए हैं। इसके अलावा, 18 भारतीय जहाज भी वर्तमान में इसी क्षेत्र में मौजूद हैं। कुल मिलाकर 28 जहाजों पर संकट अभी भी मंडरा रहा है। जहाजरानी मंत्रालय के विशेष सचिव राजेश सिन्हा ने मौजूदा हालात पर सवालों के जवाब देते हुए स्थिति को स्पष्ट किया।
फंसे हुए विदेशी जहाजों की डिटेल
विशेष सचिव ने बताया कि भारत आ रहे इन 10 विदेशी जहाजों में महत्वपूर्ण ऊर्जा उत्पाद मौजूद हैं।
3 जहाज: एलपीजी (LPG) से लदे हैं।
4 जहाज: कच्चा तेल (Crude Oil) लेकर आ रहे हैं।
3 जहाज: एलएनजी (LNG) से भरे हुए हैं।
इनके अलावा, भारतीय ध्वज वाले जहाज भी हैं। इनमें एलपीजी के तीन टैंकर, एक एलएनजी वाहक और कच्चे तेल के चार टैंकर शामिल हैं। एक खाली टैंकर में एलपीजी भरी जा रही है। पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष के बीच संकरे जलडमरूमध्य में फंसे लगभग 500 जहाजों में ये जहाज भी शामिल हैं। अब तक, भारतीय ध्वज वाले आठ जहाज सुरक्षित रूप से निकल चुके हैं।
भारतीय ध्वज वाले 18 जहाज फंसे
सिन्हा ने बताया कि जलडमरूमध्य के पश्चिमी हिस्से में भारतीय ध्वज वाले 18 जहाज हैं, जिनमें 485 नाविक सवार हैं। दो अन्य जहाज पूर्वी हिस्से में फंसे हुए हैं। पश्चिमी हिस्से में मौजूद जहाजों में एलपीजी जहाज जग विक्रम, ग्रीन आशा और ग्रीन सानवी शामिल हैं। एक खाली जहाज में एलपीजी भरी जा रही है। इस क्षेत्र में मौजूद अन्य भारतीय ध्वज वाले जहाजों में एक तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) टैंकर, चार कच्चे तेल के टैंकर, एक रासायनिक उत्पाद परिवहन करने वाला जहाज, तीन कंटेनर जहाज और दो ‘बल्क’ कैरियर शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, एक जहाज ड्रेजर है और तीन जहाज नियमित रखरखाव के लिए बंदरगाह पर हैं। जब पश्चिम एशिया में युद्ध छिड़ा था, तब होर्मुज जलडमरूमध्य में मूल रूप से 28 भारतीय ध्वज वाले जहाज थे। इनमें से 24 जलडमरूमध्य के पश्चिमी हिस्से में और चार पूर्वी हिस्से में थे। पिछले कुछ दिनों में, पश्चिमी हिस्से से छह और पूर्वी हिस्से से दो जहाज सुरक्षित स्थान पर पहुंचने में सफल रहे हैं।
सरकार की प्राथमिकता
राजेश सिन्हा ने जोर देकर कहा कि इस तनावपूर्ण स्थिति के बीच सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि भारतीय झंडे वाले जहाज जो भारत के लिए माल ला रहे हैं, उन्हें होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित और बिना किसी बाधा के गुजरने दिया जाए। अमेरिका और इजरायल के ईरान पर हमले और ईरान की व्यापक जवाबी कार्रवाई ने जलडमरूमध्य से जहाजों के आवागमन को लगभग ठप कर दिया है। यह संकरा समुद्री मार्ग खाड़ी देशों से दुनिया भर में तेल और गैस के निर्यात का प्रमुख मार्ग है। हालांकि, ईरान ने पिछले सप्ताह कहा था कि ईरानी अधिकारियों के साथ समन्वय के बाद ‘गैर-शत्रु’ देशों के पोत जलमार्ग से गुजर सकते हैं।
राहत की खबर: दो जहाज सुरक्षित निकले
एक सकारात्मक अपडेट शेयर करते हुए बताया गया कि लगभग 94,000 टन रसोई गैस ले जाने वाले दो एलपीजी जहाजों ने शनिवार को सुरक्षित रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य को पार कर लिया है। उम्मीद है कि ये दोनों जहाज अगले दो दिनों के भीतर मुंबई पोर्ट और न्यू मैंगलोर पोर्ट पर लंगर डालेंगे। इनमें दो एलपीजी वाहक पोत, बीडब्ल्यू टीवाईआर और बीडब्ल्यू ईएलएम शामिल हैं, जिनमें लगभग 94,000 टन एलपीजी का संयुक्त कार्गो है। ये पोत पिछले कुछ दिनों में युद्धग्रस्त क्षेत्र से सुरक्षित रूप से निकल चुके हैं।
खाली जहाजों की वापसी पर स्थिति
जब यह सवाल पूछा गया कि नए सिरे से माल लादने के लिए कितने खाली जहाजों को वापस फारस की खाड़ी भेजा जाएगा, तो सिन्हा ने स्पष्ट किया कि वर्तमान हालात को देखते हुए खाली जहाजों को वापस भेजने का समय अभी नहीं आया है। उन्होंने कहा- हम अभी उस चरण तक नहीं पहुंचे हैं जहां हम उन्हें (भारतीय झंडे वाले जहाजों को) वापस भेजना शुरू करें।
बीमा प्रीमियम में भारी बढ़ोतरी
जहाजों के फंसे होने के अलावा, इस तनाव का सीधा असर व्यापारिक लागत पर भी पड़ रहा है। सिन्हा ने बताया कि खतरा केवल होर्मुज जलडमरूमध्य तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके आस-पास के बाहरी इलाके भी अब ‘हाई-रिस्क एरिया’ (HRA) की श्रेणी में आ गए हैं। युद्ध और तनाव से पहले कमर्शियल बीमा प्रीमियम बीमित राशि (Insured Value) का मात्र 0.04% हुआ करता था। लेकिन अब इसमें भारी वृद्धि हुई है। सिन्हा ने एक विशिष्ट मामले का उदाहरण देते हुए बताया कि अब यह प्रीमियम बढ़कर बीमित राशि का 0.7% हो गया है, और आने वाले समय में इसके और भी अधिक बढ़ने की आशंका है।