ऊर्जा संकट से बढ़ेगा दबाव, आयातक देशों पर सबसे ज्यादा असर
आईएमएफ के मुताबिक, पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के चलते तेल और गैस की आपूर्ति प्रभावित हो रही है। दुनिया के करीब 25-30 प्रतिशत तेल और 20 प्रतिशत एलएनजी की सप्लाई होर्मुज जलडमरूमध्य से होती है। ऐसे में यदि यहां किसी तरह की बाधा आती है, तो इसका सीधा असर एशिया और यूरोप के उन देशों पर पड़ेगा, जो ऊर्जा आयात पर निर्भर हैं।
गरीब और विकासशील देशों पर दोहरी मार
रिपोर्ट में कहा गया है कि अफ्रीका और एशिया के कई गरीब देश पहले ही आर्थिक चुनौतियों से जूझ रहे हैं। अब बढ़ती ऊर्जा कीमतों और सप्लाई में कमी के कारण उनकी स्थिति और खराब हो सकती है। इन देशों को महंगे दाम पर भी पर्याप्त ईंधन नहीं मिल पा रहा, जिससे आर्थिक गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं।
खाद्य और उर्वरक संकट गहराने का खतरा
आईएमएफ ने आगाह किया है कि यह संकट केवल ऊर्जा तक सीमित नहीं रहेगा। खाद्य और उर्वरकों की कीमतों में बढ़ोतरी से भी वैश्विक स्तर पर दबाव बढ़ेगा। खासकर गरीब देशों में खाद्य संकट गहरा सकता है और उन्हें बाहरी सहायता की जरूरत पड़ सकती है।
लंबा चला युद्ध तो बढ़ेगा संकट का दायरा
संस्था का मानना है कि अगर यह संघर्ष अल्पकालिक रहा, तो तेल-गैस की कीमतों में अचानक उछाल देखने को मिलेगा। लेकिन यदि यह लंबे समय तक चला, तो ऊर्जा की कीमतें लगातार ऊंची बनी रहेंगी, जिससे आयात करने वाले देशों की आर्थिक स्थिति और कमजोर होगी।
उद्योग और आम उपभोक्ता दोनों प्रभावित
एशिया के बड़े मैन्युफैक्चरिंग देशों में ईंधन और बिजली की लागत बढ़ने से उत्पादन महंगा हो रहा है। इसका असर सीधे उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ रहा है। साथ ही कई देशों में भुगतान संतुलन पर दबाव बढ़ने से उनकी मुद्रा भी कमजोर हो रही है।
यूरोप में दोहराया जा सकता है गैस संकट जैसा हाल
आईएमएफ ने चेतावनी दी है कि यूरोप में 2021-22 जैसा गैस संकट फिर से पैदा हो सकता है। इटली और यूनाइटेड किंगडम जैसे देश ज्यादा प्रभावित हो सकते हैं, जबकि फ्रांस और स्पेन अपनी परमाणु और नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता के कारण अपेक्षाकृत बेहतर स्थिति में रह सकते हैं।
सप्लाई चेन और लॉजिस्टिक्स पर भी असर
इस संघर्ष के चलते वैश्विक सप्लाई चेन भी प्रभावित हो रही है। जहाजों के रूट बदलने से ट्रांसपोर्ट और बीमा लागत बढ़ गई है, जिससे सामान की डिलीवरी में देरी हो रही है। साथ ही, खाड़ी क्षेत्र से मिलने वाले हीलियम और अन्य जरूरी संसाधनों की सप्लाई भी प्रभावित हो सकती है।
वित्तीय बाजारों में बढ़ी अस्थिरता
इस भू-राजनीतिक तनाव का असर वैश्विक वित्तीय बाजारों पर भी दिख रहा है। शेयर बाजारों में गिरावट, बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी और बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ गया है। हालांकि, यह गिरावट अभी पिछले बड़े संकटों जितनी गंभीर नहीं है, लेकिन इससे वित्तीय स्थितियां सख्त हो गई हैं।
आईएमएफ की सलाह: सतर्क रहें और सही नीतियां अपनाएं
आईएमएफ ने देशों को सलाह दी है कि वे इस स्थिति से निपटने के लिए संतुलित और प्रभावी नीतियां अपनाएं। खासतौर पर कम संसाधनों वाले देशों को अधिक सतर्क रहने की जरूरत है। आईएमएफ की प्रबंध निदेशक क्रिस्टालिना जॉर्जीवा ने कहा कि “अनिश्चितता भरे इस दौर में अधिक देशों को समर्थन की जरूरत है और हम उनके साथ खड़े हैं।”