यह अभियान प्रदेश की लगभग 92 हजार सरकारी स्कूलों में एक साथ चलाया जाएगा जहां प्रतिदिन अलग अलग गतिविधियां आयोजित होंगी। इन गतिविधियों में प्रवेशोत्सव नामांकन अभियान खेलकूद सांस्कृतिक कार्यक्रम और बाल सभाएं प्रमुख रूप से शामिल रहेंगी। सरकार का मानना है कि इस तरह के आयोजन से न केवल बच्चों में स्कूल के प्रति आकर्षण बढ़ेगा बल्कि अभिभावकों की भागीदारी भी मजबूत होगी।
अभियान के पहले दिन यानी 1 अप्रैल को सभी स्कूलों में प्रवेशोत्सव का आयोजन किया जाएगा। इस दौरान बच्चों का स्वागत किया जाएगा और कक्षा 1 से 8 तक के विद्यार्थियों के लिए बाल सभा आयोजित होगी। साथ ही विद्यार्थियों को निःशुल्क पाठ्यपुस्तकों का वितरण सुनिश्चित किया जाएगा ताकि सत्र की शुरुआत से ही पढ़ाई सुचारू रूप से चल सके। कई स्थानों पर साइकिल और अन्य आवश्यक सामग्री भी वितरित की जाएगी जिससे छात्रों को स्कूल आने में सुविधा मिल सके।
दूसरे दिन भविष्य से भेंट कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा जिसमें समाज के विभिन्न क्षेत्रों के सफल और प्रेरणादायी व्यक्तियों को स्कूलों में आमंत्रित किया जाएगा। ये अतिथि बच्चों के साथ संवाद करेंगे और उन्हें शिक्षा का महत्व समझाएंगे। इस पहल का उद्देश्य बच्चों को प्रेरित करना और उन्हें अपने भविष्य के प्रति जागरूक बनाना है। जिला प्रशासन के अधिकारियों को भी निर्देश दिए गए हैं कि वे स्कूलों में जाकर बच्चों से सीधे संवाद करें।
तीसरे दिन सांस्कृतिक और खेलकूद गतिविधियों के माध्यम से स्कूलों में उत्सव जैसा माहौल बनाया जाएगा। इस दिन अभिभावकों को भी आमंत्रित किया जाएगा ताकि वे स्कूल की गतिविधियों में भाग ले सकें। साथ ही शिक्षा से जुड़ी सरकारी योजनाओं की जानकारी भी उन्हें दी जाएगी। जिन विद्यार्थियों की उपस्थिति 85 प्रतिशत से अधिक रही है उनके अभिभावकों का सम्मान किया जाएगा जिससे अन्य परिवार भी प्रेरित हो सकें।
अभियान के अंतिम दिन हार के आगे जीत कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। इसमें उन विद्यार्थियों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा जो किसी कारणवश अपनी कक्षा में सफल नहीं हो पाए हैं। उनके अभिभावकों को समझाइश दी जाएगी कि बच्चों को निराश न होने दें और उन्हें आगे पढ़ाई जारी रखने के लिए प्रोत्साहित करें। इसी दिन स्कूल प्रबंधन समितियों की बैठक भी होगी जिसमें शत प्रतिशत नामांकन सुनिश्चित करने के लिए कार्ययोजना तैयार की जाएगी।
सरकार का मानना है कि स्कूल चलें हम अभियान शिक्षा के प्रति सकारात्मक माहौल तैयार करेगा और स्कूल छोड़ चुके बच्चों को दोबारा शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने में मददगार साबित होगा। यह पहल न केवल नामांकन बढ़ाने का प्रयास है बल्कि बच्चों के उज्जवल भविष्य की दिशा में एक मजबूत कदम भी है।