गिरफ्तार आरोपियों को ग्वालियर लाया गया है, जहां उन्हें कोर्ट में पेश कर रिमांड पर लिया जाएगा। पुलिस जांच में सामने आया है कि ठगी की रकम को पहले कुछ चुनिंदा खातों में डाला गया और फिर 15 राज्यों के 300 से ज्यादा बैंक खातों में ट्रांसफर कर ट्रेल छिपाने की कोशिश की गई।
दिल्ली से पकड़े गए आरोपी, बैंक नेटवर्क का खुलासा
जांच में पता चला कि करीब 28 लाख रुपये इंडसइंड बैंक के एक खाते में ट्रांसफर किए गए थे। तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पुलिस टीम दिल्ली पहुंची और तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया। उनके पास से पासबुक, चेकबुक, एटीएम कार्ड और मोबाइल फोन बरामद किए गए हैं। पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि वे फर्जी बैंक खाते खुलवाकर उन्हें “म्यूल अकाउंट” के रूप में साइबर ठगों को बेचते थे। पूरा नेटवर्क टेलीग्राम के जरिए संचालित होता था।
कौन क्या करता था
हरीश गढ़वाल (27) – छिंदवाड़ा निवासी, दिल्ली में रहकर बैंक खाते खुलवाता और ऑपरेट करता था।
सौरव यादव (23) – इसके खाते में 28 लाख रुपये ट्रांसफर हुए थे।
शरद डेहरिया (20) – सौरव के साथ जॉइंट अकाउंट संचालित करता था।
300 से ज्यादा खातों में पहुंचाई गई रकम
ठगी की राशि सबसे पहले दिल्ली, नोएडा, आंध्र प्रदेश के गुंटूर और वाराणसी के पांच खातों में भेजी गई। इनमें आंध्र प्रदेश के दो खातों में करीब 1.5 करोड़ और दिल्ली-यूपी के खातों में लगभग 1 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए गए। इसके बाद यह रकम देश के 15 राज्यों के 300 से अधिक खातों में फैलाई गई।
फर्जी फर्म के जरिए लेनदेन
जांच के दौरान दिल्ली की एक फर्म “जिंग्गा क्रंच एंड स्नैक्स” के खाते में बड़ी रकम ट्रांसफर होने का खुलासा हुआ। पुलिस ने संबंधित लोगों से पूछताछ की, जिन्होंने बताया कि यह फर्म दूसरों के कहने पर खोली गई थी और बदले में उन्हें 2.5 लाख रुपये कमीशन मिला था।
ऐसे रचा गया ठगी का जाल
ग्वालियर के विंडसर हिल्स निवासी 90 वर्षीय रिटायर्ड डॉक्टर को आरोपियों ने व्हाट्सऐप कॉल कर खुद को सीबीआई अधिकारी बताया। आधार और पैन कार्ड के दुरुपयोग का डर दिखाकर उन्हें ‘डिजिटल अरेस्ट’ कर लिया गया। आरोपियों ने 27 दिनों तक उन्हें वीडियो कॉल पर निगरानी में रखा और इस दौरान अलग-अलग खातों में 2.52 करोड़ रुपये ट्रांसफर करवा लिए।