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TET नियम पर सियासत तेज दिग्विजय सिंह ने CM मोहन यादव को लिखा पत्र लाखों शिक्षकों को राहत की मांग


भोपाल । मध्यप्रदेश में शिक्षक पात्रता परीक्षा यानी TET को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है इस मुद्दे ने अब राजनीतिक रंग भी ले लिया है जब पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने मुख्यमंत्री मोहन यादव को पत्र लिखकर इस नियम पर दोबारा विचार करने की मांग की है उन्होंने अपने पत्र में स्पष्ट तौर पर कहा है कि यह निर्णय लाखों शिक्षकों के भविष्य को प्रभावित कर रहा है इसलिए सरकार को संवेदनशीलता के साथ इस पर पुनर्विचार करना चाहिए

दिग्विजय सिंह ने अपने पत्र में इस बात पर जोर दिया कि TET की अनिवार्यता को भूतलक्षी यानी पिछली तारीख से लागू करना न्यायसंगत नहीं है उन्होंने सुझाव दिया कि इसे भविष्यलक्षी प्रभाव से लागू किया जाना चाहिए ताकि पहले से कार्यरत शिक्षकों पर अचानक कोई अतिरिक्त बोझ न पड़े उनका कहना है कि जिन शिक्षकों ने वर्षों पहले नियुक्ति पाई है और लंबे समय से सेवा दे रहे हैं उनके लिए नए नियमों को अचानक लागू करना असमानता पैदा करता है

इस फैसले के बाद राज्यभर में दो लाख से अधिक शिक्षकों के बीच चिंता का माहौल बन गया है खासतौर पर वे शिक्षक जो वर्ष 2009 से पहले नियुक्त हुए थे और जिनकी सेवा अवधि में अभी पांच साल से अधिक का समय शेष है उन्हें अब TET परीक्षा देना अनिवार्य किया गया है ऐसे में कई शिक्षकों को अपनी नौकरी और भविष्य को लेकर असमंजस की स्थिति का सामना करना पड़ रहा है

दिग्विजय सिंह ने सरकार से यह भी मांग की है कि इस पूरे मामले में रिव्यू या क्यूरेटिव पिटीशन दायर करने पर विचार किया जाए ताकि न्यायिक स्तर पर भी इस मुद्दे का समाधान निकल सके उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि अंतिम निर्णय आने तक TET की अनिवार्यता को स्थगित रखा जाए ताकि शिक्षकों को मानसिक और पेशेवर दबाव से राहत मिल सके

इस मुद्दे ने शिक्षा व्यवस्था के भीतर कई सवाल खड़े कर दिए हैं एक तरफ सरकार गुणवत्ता और मानकों को बेहतर बनाने की दिशा में कदम उठा रही है वहीं दूसरी ओर लंबे समय से सेवा दे रहे शिक्षकों के सामने नई चुनौती खड़ी हो गई है विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी नीति को लागू करते समय संतुलन और व्यावहारिकता बेहद जरूरी होती है ताकि सुधार के प्रयासों का असर नकारात्मक न पड़े

फिलहाल सभी की नजरें सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार इस मांग पर किस तरह प्रतिक्रिया देती है और क्या शिक्षकों को किसी तरह की राहत मिलती है या नहीं यह मुद्दा आने वाले समय में और ज्यादा चर्चा का विषय बन सकता है क्योंकि इससे सीधे तौर पर शिक्षा व्यवस्था और लाखों परिवारों का भविष्य जुड़ा हुआ है

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