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भोपाल में हाई प्रोफाइल केस, EOW में शिकायत दर्ज, 237 प्रोजेक्ट की मंजूरी पर सियासत गरम


भोपाल । भोपाल में भ्रष्टाचार के मामले में हलचल मची हुई है। पूर्व आईएफएस आजाद सिंह डबास ने 4 आईएएस अधिकारियों के खिलाफ ईओडब्ल्यू में शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि 23 मई 2025 को बिना सिया बैठक के 237 प्रोजेक्ट को मंजूरी दे दी गई थी। इस प्रक्रिया में करोड़ों के भ्रष्टाचार के संकेत मिलते हैं।

शिकायत के अनुसार आरोपित अधिकारियों में आईएएस अशोक बर्णवाल नवनीत मोहन कोठारी उमा महेश्वरी आर और श्रीमन शुक्ला शामिल हैं। आजाद सिंह डबास का कहना है कि इन अधिकारियों ने पर्यावरण नियमों का उल्लंघन करते हुए परियोजनाओं को अनुमति दी। जबकि पर्यावरण मंजूरी से पहले सिया की बैठक बुलाना अनिवार्य होता है।

पूर्व आईएफएस ने आरोप लगाया कि बिना बैठक के परियोजनाओं को अनुमति देना न केवल नियमों का उल्लंघन है बल्कि यह करोड़ों रुपए के भ्रष्टाचार को जन्म देता है। उन्होंने EOW से इन सभी अधिकारियों के खिलाफ FIR दर्ज करने और जांच करने की मांग की है।

जानकारी के अनुसार आरोपित अधिकारियों में तत्कालीन एसीएस पर्यावरण अशोक बर्णवाल प्रमुख सचिव पर्यावरण नवनीत मोहन कोठारी सदस्य सचिव सिया उमा महेश्वरी आर और प्रभारी सदस्य सचिव सिया श्रीमन शुक्ला शामिल थे। शिकायत में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि इस गैरकानूनी मंजूरी से पर्यावरण और सरकारी प्रक्रियाओं की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लग गया है।

विशेषज्ञों का कहना है कि यह मामला राज्य के प्रशासनिक तंत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। ईओडब्ल्यू की जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि आरोप कितने प्रमाणिक हैं। इस मामले ने न केवल सरकारी अधिकारियों बल्कि बड़ी परियोजनाओं की प्रक्रिया पर भी ध्यान खींचा है।

पूर्व IFS आजाद सिंह डबास ने मीडिया से बातचीत में कहा कि उन्हें यह कदम उठाने के लिए मजबूरी महसूस हुई। उन्होंने कहा कि नियमों का उल्लंघन करने वाले किसी भी स्तर के अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई होना चाहिए। उनका यह कदम भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त संदेश के रूप में देखा जा रहा है।

राज्य के प्रशासनिक माहौल में इस मामले ने हलचल मचा दी है और ईओडब्ल्यू द्वारा की जाने वाली कार्रवाई को लेकर जनता और मीडिया में उत्सुकता बढ़ गई है। विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि FIR दर्ज होती है तो यह मामले की गंभीरता को दर्शाएगा और भविष्य में परियोजना मंजूरी प्रक्रियाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करने में मदद करेगा।

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