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TET अनिवार्यता पर भड़के शिक्षक, बोले- 26 साल के अनुभवी से भी दोबारा परीक्षा लें


भोपाल  मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में टीईटी (Teacher Eligibility Test) अनिवार्यता को लेकर शिक्षकों का गुस्सा खुलकर सामने आ गया है। 20 से 25 साल तक सेवा दे चुके शिक्षक इस फैसले को अपने अनुभव और सम्मान के खिलाफ बता रहे हैं। प्रदर्शन के दौरान शिक्षकों ने सरकार से इस आदेश को तत्काल वापस लेने की मांग की और चेतावनी दी कि यदि जल्द निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन उग्र रूप ले सकता है।

‘अनुभव की अनदेखी, नियमों का अन्यायपूर्ण लागू होना’
प्रदर्शन कर रहीं शिक्षिका शीबा खान ने कहा कि सरकार का यह फैसला पूरी तरह अव्यवहारिक है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या 26 साल के अनुभवी कलेक्टर से भी दोबारा परीक्षा देने को कहा जाएगा? वहीं शिक्षिका प्रियंका शर्मा ने इसे “तानाशाही निर्णय” बताते हुए कहा कि नियुक्ति के समय जो नियम लागू थे, उनका पालन किया गया था। अब पुराने शिक्षकों पर नए नियम लागू करना पूरी तरह गलत है।

रिटायरमेंट के करीब शिक्षकों पर बढ़ा दबाव
शिक्षकों का कहना है कि जिनकी सेवा में केवल कुछ ही साल बचे हैं, उनसे दोबारा परीक्षा की मांग करना न केवल अनुचित है बल्कि मानसिक दबाव भी बढ़ा रहा है। उनका तर्क है कि इतने वर्षों का अनुभव किसी भी परीक्षा से अधिक महत्वपूर्ण होता है और इसे नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।

सरकार को रिव्यू पिटीशन दाखिल करने की मांग
प्रदर्शन में शामिल शिक्षिका संगीता कुशवाहा ने सरकार से सुप्रीम कोर्ट में रिव्यू पिटीशन दाखिल करने की मांग की। उन्होंने कहा कि यह फैसला हजारों शिक्षकों के भविष्य को प्रभावित कर रहा है और इसे जल्द से जल्द संशोधित किया जाना चाहिए।

18 अप्रैल को परिवार सहित बड़ा प्रदर्शन
अध्यापक-शिक्षक संयुक्त मोर्चा के पदाधिकारी उपेंद्र कौशल ने बताया कि 8 अप्रैल को जिला स्तर पर प्रदर्शन के बाद DPI भोपाल को ज्ञापन सौंपा गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि 11 अप्रैल तक सरकार ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया, तो 18 अप्रैल को प्रदेशभर के शिक्षक परिवार सहित भोपाल में बड़ा प्रदर्शन करेंगे और मांगें पूरी होने तक डटे रहेंगे।

DPI का आदेश और उसके प्रभाव
लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) भोपाल के आदेश के अनुसार, जिन शिक्षकों की सेवानिवृत्ति में पांच वर्ष से अधिक समय शेष है, उन्हें दो साल के भीतर टीईटी पास करना अनिवार्य होगा, अन्यथा सेवा समाप्ति का खतरा रहेगा। विभाग का कहना है कि यह निर्णय सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के आधार पर लिया गया है।

1.5 लाख शिक्षक प्रभावित, 70 हजार सीधे दायरे में
शिक्षक संगठनों के अनुसार इस आदेश से करीब 1.5 लाख शिक्षक प्रभावित होंगे, जिनमें से लगभग 70 हजार शिक्षक ऐसे हैं, जिनकी नियुक्ति 2011 से पहले हुई थी। उनका कहना है कि आरटीई एक्ट 2009 और टीईटी 2011 के बाद लागू हुआ था, इसलिए पुराने शिक्षकों पर यह नियम लागू करना “रेट्रोस्पेक्टिव” यानी पिछली तारीख से नियम लागू करने जैसा है।

संयुक्त लड़ाई की तैयारी, आंदोलन होगा तेज
शिक्षक संगठनों ने साफ कर दिया है कि अब वे एकजुट होकर इस फैसले के खिलाफ लड़ाई लड़ेंगे। 11 अप्रैल को ब्लॉक स्तर पर आंदोलन कर स्थानीय जनप्रतिनिधियों को ज्ञापन सौंपा जाएगा। इसके बाद भी मांगें नहीं मानी गईं तो राजधानी में बड़ा आंदोलन किया जाएगा।

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