15 साल की उम्र पार कर चुकी बसें, खतरनाक हालात
मध्यप्रदेश में 899 ऐसी बसें हैं, जो 15 साल की उम्र पार कर चुकी हैं। ये वाहन खटारा हो चुके हैं और फिर भी शहरों और जिलों के बीच यात्रियों को ढो रही हैं। जानकारी के अनुसार, सबसे ज्यादा खटारा बसें जबलपुर में हैं और सबसे कम रीवा संभाग में। परिवहन विभाग के सचिव मनीष सिंह ने सभी बसों की सूची आयुक्त विवेक शर्मा को सौंप दी है। रोजाना प्रदेश में 11,000 वैध बसें चल रही हैं, जिनमें लगभग 4.5 लाख यात्री सफर करते हैं।
बस ऑपरेटरों की याचिकाओं पर कोर्ट का फैसला
बस ऑपरेटरों ने कोर्ट में यह दलील दी थी कि उनकी बसों को जब परमिट और फिटनेस सर्टिफिकेट मिला, तब उनकी उम्र 15 साल नहीं हुई थी। लेकिन अदालत ने कहा कि नियम और संशोधन पहले ही वैध ठहराए जा चुके हैं और उनके आधार पर जारी आदेश अवैध नहीं है। जस्टिस विशाल मिश्रा की बेंच ने 27 फरवरी 2026 को सुनवाई पूरी करने के बाद सभी 10 याचिकाएं खारिज कर दीं। अब प्रदेश में 15 साल से अधिक पुराने कमर्शियल वाहनों के खिलाफ कार्रवाई का रास्ता साफ हो गया है।
पुराने वाहनों पर नियम और सख्ती
मध्यप्रदेश मोटरयान नियम, 1994 के तहत:
10 साल से पुरानी स्टेज कैरिज बस को अंतरराज्यीय परमिट नहीं मिलेगा।
15 साल से पुरानी मंजिली बस को राज्य के अंदर साधारण रूट का परमिट नहीं मिलेगा।
20 साल से पुरानी गाड़ी को किसी भी तरह का परमिट नहीं मिलेगा।
हालांकि, अधिकारियों की लापरवाही के कारण 899 खटारा बसें अब तक सड़कों पर चल रही थीं, जिससे यात्रियों की सुरक्षा खतरे में थी।
नई ‘जनबस’ योजना से मिलेगा आधुनिक परिवहन
पुरानी बसों के हटने के बाद सरकार ‘जनबस’ योजना लागू करेगी। अप्रैल 2026 से इंदौर से शुरुआत होगी और पहले चरण में 25 जिलों में 10,879 बसों का संचालन किया जाएगा। योजना में ई-बस, मोबाइल ऐप, सेंट्रलाइज्ड मॉनिटरिंग और कार्गो सुविधा जैसी आधुनिक सेवाएं शामिल होंगी। इसके संचालन के लिए मध्यप्रदेश यात्री परिवहन एंड इन्फ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड नामक नई कंपनी बनाई गई है, जबकि बसें निजी ऑपरेटर चलाएंगे।
मध्यप्रदेश सरकार ने 15 साल से पुरानी 899 बसों को सड़क से हटाने का फैसला किया है। हाईकोर्ट ने आदेश को वैध करार दिया, बस ऑपरेटरों की सभी याचिकाएं खारिज की गईं। पुरानी बसें हटने के बाद ‘जनबस’ योजना शुरू होगी, जिससे आधुनिक, सुरक्षित और व्यवस्थित परिवहन व्यवस्था प्रदेशवासियों को मिलेगी।