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किन्नर समाज की आस्था का अनोखा केंद्र: जहां माता करती हैं मुर्गे की सवारी

मेहसाणा। देश में एक से बढ़कर एक मंदिर हैं जिनके लिए भक्तों की आस्था गहरी है. कुछ मंदिर रहस्‍यों से भरे है तो कुछ मंदिर आश्चर्य का कारण बनते हैं. इस कड़ी में हम गुजरात के मेहसाणा जिले में स्थित देवी बहुचरा माता मंदिर के बारे में जानेंगे जहां से किन्नर समाज की गहरी आस्था जुड़ी है. देश के कोने-कोने से यहां किन्नर पहुंचते हैं और बहुचरा माता को अर्धनारीश्वर के रूप में पूजकर उनका आशीर्वाद प्राप्त करें. आइए बहुचरा माता मंदिर के बारे में विस्तार से जानते हैं.

बहुचरा देवी मंदिर की मान्यता
स्‍थानीय मान्यताओं के अनुसार बहुचरा माता ने एक साथ बहुत सारे राक्षसों का अंत किया था जिसके कारण देवी का नाम बहुचरा पड़ा. मंद‍िर में बहुत सारे मुर्गे घूमते है जिसके कारण मंदिर को मुर्गों वाली देवी के रूप में भी जाना जाता है. माता बहुचरा मुर्गे की सवारी करती है. यह मंदिर किन्नरों के लिए गहरी आस्था का केंद्र है. मंदिर को लेकर मान्‍यता है क‍ि जो भी व्यक्ति इस मंदिर में पूजा कर माता का आशीर्वाद लेता है उसे अगले किसी भी जन्म में क‍िन्‍नर के रूप में नहीं जन्‍म लेना पड़ता. वहीं, संतान प्राप्ति की इच्छा भी देवी बहुचरा पूरी करती है. मान्यता है कि जब माता के आशीर्वाद से संतान प्राप्ति हो जाती है तो बच्चे के केश मंदिर में छोड़े जाती है और मंदिर में मुर्गों के दान भी किया जाता है.
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