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कोर्स के दौरान शादी पर रोक ,नर्सिंग स्कूल का सख्त; फरमान छात्राओं में मचा हड़कंप


नई दिल्ली । बिहार के गोपालगंज जिले के हथुआ स्थित जीएनएम नर्सिंग स्कूल से एक ऐसा आदेश सामने आया है जिसने शिक्षा व्यवस्था और छात्राओं की व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर बहस छेड़ दी है। स्कूल प्रशासन की ओर से जारी इस निर्देश के अनुसार वहां पढ़ने वाली किसी भी छात्रा को कोर्स की अवधि के दौरान शादी करने की अनुमति नहीं होगी। यह अवधि लगभग तीन साल की बताई जा रही है। आदेश में साफ कहा गया है कि अगर इस दौरान किसी छात्रा के विवाह करने की जानकारी मिलती है तो उसका नामांकन तुरंत प्रभाव से रद्द कर दिया जाएगा और इसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित छात्रा की होगी।

यह आदेश 16 अप्रैल 2026 को जारी किया गया बताया जा रहा है। आधिकारिक लेटर पर संस्थान की मुहर और प्राचार्या के हस्ताक्षर होने के कारण इसे गंभीरता से लिया जा रहा है। आदेश में छात्राओं को सीधे तौर पर चेतावनी दी गई है कि वे शैक्षणिक सत्र के दौरान विवाह जैसे किसी भी व्यक्तिगत निर्णय से बचें अन्यथा उन्हें अपनी पढ़ाई से हाथ धोना पड़ सकता है।

इस फरमान के सामने आने के बाद छात्राओं के बीच असमंजस और तनाव की स्थिति बन गई है। कई छात्राएं इसे अपनी निजी जिंदगी में हस्तक्षेप मान रही हैं तो कुछ इसे अनुशासन के नाम पर थोपे गए नियम के रूप में देख रही हैं। सवाल यह उठ रहा है कि क्या किसी शैक्षणिक संस्थान को इस तरह का अधिकार है कि वह छात्राओं के निजी फैसलों पर रोक लगा सके।

स्थानीय स्तर पर भी यह मुद्दा तेजी से चर्चा में आ गया है। शिक्षा और महिला अधिकारों से जुड़े लोग इसे असंवैधानिक और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के खिलाफ बता रहे हैं। उनका कहना है कि शिक्षा का उद्देश्य छात्राओं को सशक्त बनाना होना चाहिए न कि उनके निजी जीवन पर नियंत्रण स्थापित करना।

हालांकि इस पूरे मामले में स्कूल प्रशासन की ओर से अभी तक कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। प्राचार्या से संपर्क करने की कोशिश की गई लेकिन उनसे बात नहीं हो सकी। ऐसे में यह भी साफ नहीं हो पाया है कि यह आदेश किस आधार पर जारी किया गया और इसके पीछे प्रशासन की मंशा क्या है।

इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या आज के समय में भी शिक्षा संस्थानों में इस तरह के नियम लागू किए जा सकते हैं। जहां एक ओर देश में महिलाओं को बराबरी और स्वतंत्रता का अधिकार दिया गया है वहीं दूसरी ओर इस तरह के आदेश उन अधिकारों पर सवाल खड़े करते नजर आते हैं। आने वाले दिनों में यह मामला और तूल पकड़ सकता है और संभव है कि उच्च स्तर पर इसकी जांच या हस्तक्षेप भी देखने को मिले।

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