ट्रंप का दावा क्या है?
ओवल ऑफिस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने कहा कि उन्होंने अब तक कई युद्धों को रोका है, जिनमें भारत-पाकिस्तान तनाव भी शामिल है। उनके अनुसार, उस समय हालात इतने गंभीर थे कि परमाणु संघर्ष का खतरा पैदा हो गया था।ट्रंप ने दावा किया कि उन्होंने दोनों देशों को चेतावनी दी थी कि अगर लड़ाई जारी रही तो अमेरिका व्यापारिक प्रतिबंध और टैरिफ लगा सकता है। उनके मुताबिक, इसी दबाव में स्थिति शांत हुई।
भारत का स्पष्ट जवाब
भारत सरकार ने ट्रंप के इन दावों को पहले भी कई बार नकारा है और इस बार भी वही रुख दोहराया है। भारत का कहना है कि संघर्षविराम का निर्णय दोनों देशों के डायरेक्टर जनरल ऑफ मिलिट्री ऑपरेशंस (DGMO) के बीच सीधी बातचीत के बाद हुआ था।
भारतीय पक्ष ने यह भी स्पष्ट किया है कि किसी भी विदेशी देश की मध्यस्थता या दबाव की भूमिका नहीं थी।
“ऑपरेशन सिंदूर” और तनाव की पृष्ठभूमि
भारत ने हाल के घटनाक्रम में सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ “ऑपरेशन सिंदूर” जैसी कार्रवाई की थी, जिसमें पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में कई आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया गया था।
इसके बाद दोनों देशों के बीच सैन्य तनाव बढ़ा, लेकिन बाद में बातचीत के जरिए स्थिति को नियंत्रित किया गया। भारत के अनुसार, इसी प्रक्रिया के तहत संघर्षविराम पर सहमति बनी।
पाकिस्तान का रुख और अंतरराष्ट्रीय बयानबाजी
पाकिस्तान ने ट्रंप के दावों का समर्थन करते हुए उन्हें “मध्यस्थता” का श्रेय दिया था। वहीं पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने भी अमेरिका की भूमिका की सराहना की थी।इसके उलट, भारत लगातार यह कहता रहा है कि यह एक द्विपक्षीय मुद्दा है और बाहरी हस्तक्षेप की कोई भूमिका नहीं रही।
ट्रंप के बार-बार बदलते दावे
डोनाल्ड ट्रंप इससे पहले भी कई बार यह दावा कर चुके हैं कि उन्होंने भारत-पाकिस्तान तनाव को रोका था। हर बार भारत ने इन बयानों को तथ्यात्मक रूप से गलत बताया है।
अमेरिकी राष्ट्रपति का यह बयान ऐसे समय आया है जब वैश्विक राजनीति में व्यापारिक नीतियों और टैरिफ को लेकर फिर से बहस तेज है।
भारत-पाकिस्तान तनाव को लेकर अमेरिका के दावों और भारत के आधिकारिक रुख में स्पष्ट अंतर बना हुआ है। जहां ट्रंप इसे अपनी कूटनीतिक सफलता बताते हैं, वहीं भारत इसे पूरी तरह द्विपक्षीय सैन्य संवाद का परिणाम मानता है।