डीपसीक और अन्य कंपनियों पर गंभीर आरोप
Anthropic का आरोप है कि चीनी कंपनियां जैसे:
DeepSeek
Moonshot AI
MiniMax
उसके AI चैटबॉट Claude से अवैध रूप से डेटा निकालने (data extraction) और उसे अपने मॉडल को ट्रेन करने में इस्तेमाल कर रही हैं।
कंपनी का दावा है कि यह प्रक्रिया “डिस्टिलेशन” तकनीक के जरिए की जा रही है, जिससे AI मॉडल के अंदर की जानकारी चुपचाप कॉपी की जा सकती है।
ट्रंप सरकार से की गई शिकायत
Anthropic ने इस मामले को गंभीर बताते हुए अमेरिका की ट्रंप सरकार से आधिकारिक शिकायत की है और सख्त कार्रवाई की मांग की है।
कंपनी का कहना है कि यदि इस तरह की गतिविधियां नहीं रोकी गईं, तो यह अमेरिका की AI तकनीक और सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बन सकती हैं।
अमेरिकी विदेश विभाग का बड़ा कदम
इस पूरे मामले के बाद अमेरिकी विदेश विभाग ने भी सख्त रुख अपनाया है। विभाग ने वैश्विक स्तर पर एक मुहिम शुरू करने के निर्देश दिए हैं।
शुक्रवार को दुनिया भर में अमेरिकी राजनयिक और कांसुलर मिशनों को एक केबल भेजा गया, जिसमें कहा गया कि:
विदेशी सरकारों के साथ AI डेटा चोरी का मुद्दा उठाया जाए
अमेरिकी AI मॉडल से जानकारी निकालने की कोशिशों पर चिंता जताई जाए
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस पर सहयोग बढ़ाया जाए
AI तकनीक को लेकर बढ़ती वैश्विक प्रतिस्पर्धा
यह मामला सिर्फ एक तकनीकी विवाद नहीं, बल्कि AI नेतृत्व की वैश्विक होड़ का हिस्सा माना जा रहा है। अमेरिका और चीन दोनों ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में वर्चस्व स्थापित करने की दौड़ में हैं।विशेषज्ञों के अनुसार, AI मॉडल से डेटा निकालना और उसे दूसरे मॉडल को ट्रेन करने में इस्तेमाल करना अब एक बड़ा साइबर और टेक्नोलॉजी सुरक्षा मुद्दा बन चुका है।
क्या है ‘डिस्टिलेशन’ तकनीक?
रिपोर्ट्स के मुताबिक, जिस प्रक्रिया पर आरोप लगे हैं उसे “मॉडल डिस्टिलेशन” कहा जाता है।
इसमें बड़े AI मॉडल से आउटपुट लिया जाता है
फिर उसे छोटे या नए मॉडल को ट्रेन करने में इस्तेमाल किया जाता है
इससे बिना मूल डेटा के भी AI को “कॉपी जैसा ज्ञान” मिल सकता है
बढ़ता तनाव और आगे की राह
इस विवाद ने अमेरिका-चीन टेक संबंधों में नई दरार पैदा कर दी है। अब यह देखना अहम होगा कि़, क्या अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कोई नियम बनते हैंया AI को लेकर यह प्रतिस्पर्धा और तेज होती है आरोपों और अमेरिकी सरकार की प्रतिक्रिया के बाद AI डेटा सुरक्षा और तकनीकी गोपनीयता का मुद्दा एक बार फिर वैश्विक चर्चा के केंद्र में आ गया है। यह मामला आने वाले समय में AI नीति और अंतरराष्ट्रीय टेक नियमों को भी प्रभावित कर सकता है।