नई दिल्ली। भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) के चेयरमैन ने कमोडिटी डेरिवेटिव्स बाजार को लेकर एक अहम संकेत दिया है। उनके अनुसार फिलहाल बैंकों और बीमा कंपनियों को इस सेगमेंट में प्रवेश देने पर सहमति नहीं बन पाई है।
उन्होंने बताया कि इस मुद्दे पर विभिन्न वित्तीय नियामकों के बीच चर्चा हुई है, लेकिन अभी तक एक साझा निर्णय नहीं लिया जा सका है। खासतौर पर बीमा क्षेत्र को लेकर अधिक सतर्कता बरती जा रही है क्योंकि यह लंबी अवधि के निवेश से जुड़ा होता है।
कमोडिटी डेरिवेटिव्स जैसे बाजार में कीमतों में तेजी से उतार-चढ़ाव होता है, जिससे जोखिम का स्तर बढ़ जाता है। इसी कारण नियामक संस्थाएं फिलहाल इस क्षेत्र में बैंकों और बीमा कंपनियों की भागीदारी को लेकर सावधानी बरत रही हैं।
इसके साथ ही डिजिटल ट्रेडिंग और तकनीकी जोखिमों पर भी चिंता जताई गई है। तेज गति से होने वाली एल्गोरिदमिक ट्रेडिंग और बढ़ते डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के कारण धोखाधड़ी और सिस्टम जोखिम की संभावना भी सामने आ रही है।
नई तकनीकों, खासकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते उपयोग को लेकर भी सतर्कता की बात कही गई है। हालांकि यह तकनीक बाजार की निगरानी में मदद कर सकती है, लेकिन इसके गलत इस्तेमाल की संभावना को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
इसके अलावा एकीकृत KYC सिस्टम पर भी काम जारी है, जिसका उद्देश्य पूरे वित्तीय क्षेत्र में एक समान पहचान प्रक्रिया लागू करना है। इस पर विभिन्न नियामक संस्थाएं मिलकर ढांचा तैयार कर रही हैं।