MP News : कोलार इलाके में एक परेशान करने वाला मामला सामने आया है, जहाँ एक बहुराष्ट्रीय कंपनी में काम करने वाले एक युवा दंपत्ति ने अपने दिव्यांग बेटे को पति की वृद्ध और बीमार माँ की देखभाल में छोड़ दिया। यह बच्चा, लॉकडाउन से पहले पैदा हुए जुड़वाँ बच्चों में से एक है, जो शारीरिक और मानसिक दोनों तरह से विकलांग है। दंपत्ति जबलपुर में काम करते हैं।
यह मामला तब सामने आया जब कोलार रोड स्थित बांसखेड़ी निवासी 68 वर्षीय कमला गौर ने गुरुवार को कोलार थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने बताया कि उनके बेटे विजय गौर और बहू पूजा गौर ने स्वस्थ जुड़वां बच्चे को अपने पास रखा, लेकिन 2019 में दिव्यांग बच्चे को उनके पास छोड़ दिया, जिससे उन्हें अपनी खराब सेहत के बावजूद उसकी देखभाल करने के लिए मजबूर होना पड़ा।
माता-पिता ने बहाने बनाकर बच्चे की ज़िम्मेदारी लेने से इनकार कर दिया
कमला ने पुलिस को दिए अपने बयान में कहा, “मैं बूढ़ी हूँ और उसे ज़रूरी इलाज नहीं दे सकती। उसकी हालत बिगड़ती जा रही है और मुझे उसकी जान का डर है।”
उसकी शिकायत के बाद, कोलार पुलिस ने माता-पिता को बुलाया और उनसे अपने बच्चे की देखभाल की ज़िम्मेदारी लेने का आग्रह किया, लेकिन दोनों ने बहाने बनाकर इनकार कर दिया। इसके बाद, पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 93 और किशोर न्याय (बालकों की देखभाल एवं संरक्षण) अधिनियम, 2015 की धारा 75 के तहत मामला दर्ज किया।
बच्चे का चिकित्सीय ध्यान दिया गया और उसे बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) के समक्ष पेश किया गया, जिसने अब उसकी देखभाल और आश्रय का कार्यभार संभाल लिया है।
कोलार थाना प्रभारी संजय सोनी ने कहा, “अपने बच्चे के जीवन और स्वास्थ्य की रक्षा करना प्रत्येक माता-पिता का नैतिक और कानूनी कर्तव्य है। किसी दिव्यांग बच्चे को छोड़ना अमानवीय और आपराधिक दोनों है। एक प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है और आगे की कार्रवाई की जाएगी।”