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मनोज तिवारी का ममता सरकार पर तीखा हमला, बोले- ‘खेल मंत्री होकर भी सिर्फ चाय-बिस्किट तक सीमित रहा काम’

नई दिल्ली। पूर्व क्रिकेटर और पश्चिम बंगाल के पूर्व खेल मंत्री मनोज तिवारी ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। सोशल मीडिया पर जारी एक वीडियो में उन्होंने दावा किया कि खेल मंत्री रहते हुए उन्हें पिछले पांच वर्षों तक सही तरीके से काम नहीं करने दिया गया।

मनोज तिवारी ने सीधे तौर पर टीएमसी नेता और पूर्व मंत्री अरूप बिस्वास को निशाने पर लेते हुए कहा कि उनकी लोकप्रियता और छवि से डरकर उन्हें लगातार अलग-थलग रखा गया। उन्होंने कहा कि खेल विभाग में उनकी भूमिका केवल “चाय और बिस्किट खाने” तक सीमित कर दी गई थी।

‘कार्यक्रमों में भी नहीं बुलाया गया’
तिवारी ने आरोप लगाया कि उन्हें खेल विभाग के कई अहम कार्यक्रमों से दूर रखा गया। उन्होंने कहा कि डूरंड कप जैसे बड़े टूर्नामेंट में मैदान पर मौजूद रहने के बावजूद उन्हें आधिकारिक निमंत्रण तक नहीं दिया गया। उनके मुताबिक, इसके पीछे अरूप बिस्वास की राजनीतिक सोच काम कर रही थी।

मेसी के कार्यक्रम को लेकर भी साधा निशाना
पूर्व मंत्री ने लियोनेल मेसी से जुड़े एक कार्यक्रम का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि वह उस आयोजन में इसलिए शामिल नहीं हुए क्योंकि उन्हें पहले से अंदेशा था कि वहां उन्हें अपमानित किया जा सकता है। तिवारी ने दावा किया कि आयोजन के दौरान खेल प्रेमियों को भी निराशा हाथ लगी और मेसी कुछ ही मिनटों में कार्यक्रम छोड़कर चले गए।

‘सरकार जनता नहीं, अपने हितों के लिए काम कर रही थी’
मनोज तिवारी ने कहा कि उन्होंने खेल और शिवपुर के विकास से जुड़े कई मुद्दे कैबिनेट बैठकों में उठाए, लेकिनउनकी बातों को कभी गंभीरता से नहीं लिया गया। उन्होंने राज्य सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार की सोच बेहद संकीर्ण थी और उसका फोकस जनता की बजाय अपने राजनीतिक हितों पर ज्यादा था।

ममता बनर्जी को लेकर भी कही बड़ी बात
तिवारी ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का नाम लेते हुए कहा कि एक बार जब उन्होंने अपनी बात रखने की कोशिश की तो मुख्यमंत्री ने उनसे कहा, “क्या मेरे पास और कोई काम नहीं है?” तिवारी के अनुसार, उन्हें अपनी बात रखने के लिए 20 सेकंड का समय भी नहीं दिया गया। उन्होंने कहा कि उसी दिन उन्हें एहसास हो गया था कि यह सरकार लंबे समय तक टिकने वाली नहीं है, क्योंकि इसकी नींव “झूठे वादों” पर टिकी हुई है।

मनोज तिवारी का यह बयान ऐसे समय सामने आया है जब पश्चिम बंगाल में खेल प्रशासन और राजनीतिक खींचतान को लेकर लगातार बहस चल रही है। उनके आरोपों ने राज्य की राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी है।

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