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तमिलनाडु में फंसा पेंच… विजय के बढ़ते प्रभाव को रोकने के लिए AIADMK-DMK मिला सकते हैं हाथ!


चेन्नई।
तमिलनाडु (Tamil Nadu) में सरकार बनाने को लेकर पेंच फंसता ही जा रहा है। किसी भी दल या गठबंधन के पास बहुमत नहीं होने के कारण अभी तक सरकार बनाने का रास्ता साफ नहीं हुआ है। इस बीच दक्षिण भारत (South India) के इस राज्य की राजनीति में एक ऐसा घटनाक्रम देखने को मिल रहा है, जिसकी कल्पना पिछले 50 वर्षों में किसी ने नहीं की थी। अभिनेता से नेता बने विजय और उनकी पार्टी तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) के बढ़ते प्रभाव को रोकने के लिए राज्य के दो सबसे बड़े कट्टर प्रतिद्वंद्वी डीएमके (DMK) और एआईएडीएमके (AIADMK) हाथ मिला सकते हैं। दोनों को साथ लाने में भाजपा (BJP) बड़ी भूमिका निभा सकती है।

एक रिपोर्ट के अनुसार, डीएमके के उदयनिधि स्टालिन गुट को डर है कि विजय का उदय पूर्व मुख्यमंत्री एम.जी. रामचंद्रन (MGR) के दौर की याद दिला सकता है। एमजीआर ने अपने जीवनकाल में डीएमके को कभी सत्ता में नहीं आने दिया था। वहीं, जयललिता के निधन के बाद लगातार चार चुनाव हार चुकी AIADMK अपनी राजनीतिक वजूद बचाने के लिए इस गठबंधन पर विचार कर रही है।

सूत्रों का कहना है कि भाजपा इस गठबंधन को पर्दे के पीछे से समर्थन दे रही है ताकि कांग्रेस को सत्ता से दूर रखा जा सके। आपको बता दें कि अभी तक सिर्फ कांग्रेस ने ही अपने पांच विधायकों के साथ ऐक्टर विजय को समर्थन देने का ऐलान किया है।


क्या है प्रस्तावित फॉर्मूला?

योजना के मुताबिक, ई. पलानीस्वामी (EPS) मुख्यमंत्री बनेंगे और DMK बाहर से समर्थन देगी। हालांकि पार्टी प्रमुख एम.के. स्टालिन और पुराने नेता इस अजीब प्रयोग से डरे हुए हैं। उन्हें डर है कि इस बेमेल गठबंधन से समर्थकों के बीच भारी आक्रोश पैदा हो सकता है।


विजय ने दी इस्तीफे की चेतावनी

जैसे ही इस संभावित गठबंधन की खबरें फैलीं, विजय की पार्टी टीवीके ने बड़ा दांव चल दिया है। टीवीके ने घोषणा की है कि यदि DMK-AIADMK गठबंधन सरकार बनाने का दावा पेश करता है, तो उनके सभी 108 विधायक सामूहिक इस्तीफा दे देंगे। यह कदम जनता और प्रशंसकों को सड़कों पर उतारने की एक सोची-समझी रणनीति मानी जा रही है।


किसके पास कितनी सीटें

आपको बता दें कि इस विधानसभा चुनाव में किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला है। तमिलनाडु में सरकार बनाने के लिए 118 विधायकों का समर्थन चाहिए। फिलहाल विजय की पार्टी टीवीके के पास सबसे अधिक 108 सीटें हैं। वहीं डीएमकी गठबंधन के पास 74 विधायक हैं। इनमें डीएमके 59, कांग्रेस पांच और अन्य की 10 सीटें हैं। एआईएडीएमके गठबंधन के पास यहां 53 सीटें हैं। वहीं, अन्य की संख्या 6 है।


गवर्नर ने नहीं दिया सरकार बनाने का न्योता

108 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनने के बावजूद राज्यपाल आर.वी. अर्लेकर ने विजय को सरकार बनाने का न्यौता देने से इनकार कर दिया है। राज्यपाल का कहना है कि विजय पहले 118 विधायकों का समर्थन पत्र दिखाएं। कई दलों ने राज्यपाल की इस मांग की आलोचना की है। उनका तर्क है कि बहुमत सदन के पटल पर साबित किया जाना चाहिए, न कि राजभवन में। मौजूदा विधानसभा का कार्यकाल 10 मई को समाप्त हो रहा है, जिससे राज्य में संवैधानिक संकट गहरा गया है।

इस योजना को अमलीजामा पहनाने के लिए वामपंथी दलों और वीसीके की सहमति जरूरी है। विजय ने पहले ही इन पार्टियों से संपर्क साधा है, लेकिन वे फिलहाल वेट एंड वॉच की स्थिति में हैं।

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