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BRICS 2026 : कारोबारों को मजबूत बनाने पर जोर, वैश्विक व्यापार में बढ़ेगा भारत का असर..

BRICS 2026 : नई दिल्ली । 2026 में ब्रिक्स समूह की अध्यक्षता संभालने की तैयारी के साथ भारत एक ऐसी रणनीति पर काम कर रहा है, जिसका सीधा असर छोटे और मध्यम उद्योगों पर देखने को मिलेगा। इस पूरी पहल का केंद्र MSME sector है, जिसे देश की आर्थिक रीढ़ माना जाता है। भारत का लक्ष्य है कि इस सेक्टर को सिर्फ घरेलू स्तर पर नहीं, बल्कि वैश्विक मंच पर भी मजबूत पहचान दिलाई जाए।

इस योजना के तहत भारत ब्रिक्स के ढांचे में एमएसएमई सहयोग को एक नए स्तर पर ले जाने की तैयारी कर रहा है। इसमें खासतौर पर वित्तीय पहुंच को आसान बनाना, तकनीकी सहयोग बढ़ाना और छोटे कारोबारों को अंतरराष्ट्रीय बाजार से जोड़ने जैसे कदम शामिल हैं। माना जा रहा है कि इससे छोटे उद्योगों को नई संभावनाएं मिलेंगी और वे वैश्विक सप्लाई चेन का हिस्सा बन सकेंगे।

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भारत की अध्यक्षता के दौरान कई महत्वपूर्ण बैठकों और एक बड़े एमएसएमई फोरम का आयोजन किया जाएगा। इन बैठकों का मुख्य फोकस छोटे उद्योगों की सबसे बड़ी समस्या यानी वित्तीय संसाधनों की कमी को दूर करना होगा। इसमें यह समझने की कोशिश की गई है कि कैसे आसान ऋण व्यवस्था, डिजिटल बैंकिंग और फिनटेक समाधान के जरिए छोटे व्यवसायों को मजबूती दी जा सकती है।

चर्चाओं में यह बात भी सामने आई है कि छोटे और मध्यम उद्योग न केवल रोजगार सृजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, बल्कि नवाचार और आर्थिक विकास को भी गति देते हैं। इसके बावजूद इन उद्योगों को अक्सर पर्याप्त वित्त और तकनीकी सहायता नहीं मिल पाती, जिससे उनकी ग्रोथ प्रभावित होती है। इसी अंतर को कम करने के लिए बहु-स्तरीय रणनीति तैयार की जा रही है।

भारत इस दिशा में ब्रिक्स देशों के बीच सहयोग को और मजबूत करने पर भी जोर दे रहा है। इसका उद्देश्य है कि सभी सदस्य देश अपने अनुभव और नीतिगत मॉडल साझा करें, जिससे एक ऐसा इकोसिस्टम बन सके जो छोटे व्यवसायों के लिए अनुकूल हो और उन्हें वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने में मदद मिले।

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इसके अलावा, डिजिटल भुगतान प्रणाली, वित्तीय साक्षरता और क्रेडिट क्षमता बढ़ाने जैसे पहलुओं पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। माना जा रहा है कि इन प्रयासों से छोटे कारोबारों को न केवल घरेलू बाजार में मजबूती मिलेगी, बल्कि वे अंतरराष्ट्रीय व्यापार में भी बेहतर प्रदर्शन कर सकेंगे।

भारत पहले ही कुछ देशों के साथ साझेदारी कर चुका है, जिसका उद्देश्य एमएसएमई क्षेत्र में निवेश और व्यापार को बढ़ावा देना है। यह रणनीति भारत को वैश्विक आर्थिक मंच पर और मजबूत स्थिति में लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

कुल मिलाकर यह पूरी योजना छोटे उद्योगों को नई पहचान देने और उन्हें वैश्विक विकास की मुख्य धारा से जोड़ने की दिशा में एक बड़ा प्रयास है, जिससे आने वाले वर्षों में भारतीय अर्थव्यवस्था को नई गति मिलने की उम्मीद है।

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