रिपोर्ट के अनुसार, ये मुलाकातें कतर और एशिया के एक अन्य देश की राजधानी में आयोजित की गईं। हालांकि इन बैठकों को औपचारिक वार्ता का दर्जा नहीं दिया गया है, लेकिन ऑपरेशन सिंदूर के बाद यह पहली बार है जब दोनों देशों के बीच संवाद की कोशिशें सामने आई हैं। बताया जा रहा है कि भारत में भी इस बात पर सहमति बन रही है कि इस्लामाबाद और रावलपिंडी के साथ संपर्क का एक गोपनीय माध्यम खुला रहना चाहिए।
सूत्रों के मुताबिक, इस पहल की जानकारी राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल के कार्यालय और राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय को भी दी गई है। वहीं, पाकिस्तान की ओर से भी ऐसे बैक-चैनल संवाद में रुचि दिखाई गई है।
बताया जा रहा है कि इस पूरी कवायद का मकसद भविष्य में किसी आतंकी हमले या बड़े तनाव की स्थिति में हालात को नियंत्रण से बाहर जाने से रोकना है। फिलहाल भारत और पाकिस्तान के बीच संवाद का एकमात्र आधिकारिक माध्यम डीजीएमओ स्तर की साप्ताहिक हॉटलाइन बातचीत है, जो हर मंगलवार को होती है।
भारत का मानना है कि बैक-चैनल बातचीत उसकी उस नीति के खिलाफ नहीं है, जिसमें कहा गया है कि आतंकवाद और वार्ता साथ-साथ नहीं चल सकते। इसे एक ऐसे संपर्क तंत्र के रूप में देखा जा रहा है, जिससे संकट की स्थिति में दोनों देशों के बीच सीधे संवाद संभव हो सके।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि मौजूदा अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों को देखते हुए भारत के लिए यह संवाद तंत्र जरूरी माना जा रहा है। पाकिस्तान इस समय अमेरिका, इजरायल और ईरान से जुड़े क्षेत्रीय तनावों में सक्रिय भूमिका निभा रहा है। साथ ही पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर की स्थिति पहले से अधिक मजबूत मानी जा रही है और उन्हें अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का समर्थन भी हासिल बताया जा रहा है। ऐसे में भविष्य में किसी आतंकी घटना की स्थिति में भारत के लिए वैश्विक स्तर पर पाकिस्तान पर दबाव बनाना आसान नहीं होगा।
भारत और पाकिस्तान के बीच बैक-चैनल वार्ता का इतिहास पहले भी रहा है। वर्ष 2015 से 2018 के दौरान NSA अजीत डोभाल ने बैंकॉक में अपने पाकिस्तानी समकक्षों के साथ कई दौर की बातचीत की थी। हाल ही में 30 अप्रैल 2025 को लेफ्टिनेंट जनरल मोहम्मद आसिम मलिक को पाकिस्तान का नया NSA नियुक्त किया गया है। वे पाकिस्तान के पहले ऐसे अधिकारी हैं जो ISI प्रमुख और NSA दोनों जिम्मेदारियां एक साथ संभाल रहे हैं। इससे पाकिस्तान की सैन्य और नागरिक सत्ता पर फील्ड मार्शल आसिम मुनीर का प्रभाव और मजबूत माना जा रहा है।