विजय राठौर की मौत के बाद उनकी पत्नी करुणा राठौर ने व्यवस्था और छात्रा के परिवार पर तीखे प्रहार किए हैं। करुणा का आरोप है कि उनके पति पूरी तरह बेकसूर थे, लेकिन छात्रा की मौत के बाद से ही उन्हें ‘अपराधी’ की तरह प्रताड़ित किया जा रहा था। पत्नी के मुताबिक, छात्रा के परिजन लगातार उनके घर आकर हत्या के झूठे केस में फंसाने की धमकियां देते थे। इतना ही नहीं, पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि बयानों के नाम पर विजय को थाने बुलाकर घंटों बैठाया जाता था, जिससे वे गहरे मानसिक अवसाद (डिप्रेशन) में चले गए थे।
पढ़ाई का दबाव बना काल, पर संदेह ने ली दूसरी जान
घटना की जड़ें फरवरी माह से जुड़ी हैं, जब छात्रा रोशनी का शव बाथरूम में संदिग्ध परिस्थितियों में मिला था। उस समय छात्रा के परिजनों और साथी मेडिकल छात्रों ने इसे हत्या करार देते हुए थाने का घेराव किया था। हालांकि, बाद में पुलिस जांच और मोबाइल की फॉरेंसिक रिपोर्ट में एक सुसाइड नोट बरामद हुआ था। रोशनी ने मरने से पहले खुद को व्हाट्सएप किए गए मैसेज में लिखा था “सॉरी मम्मी-पापा, नीट निकालना आसान है, लेकिन एमबीबीएस करना उससे भी कठिन है।” स्पष्ट था कि छात्रा पढ़ाई के दबाव के कारण जान दे रही थी, लेकिन इस सच्चाई के बावजूद मकान मालिक पर शक की सुई और दबाव कम नहीं हुआ।
पत्नी की न्याय की गुहार
विजय राठौर की पत्नी ने मांग की है कि उनके पति को आत्महत्या के लिए उकसाने वाले छात्रा के परिजनों पर कड़ी कार्रवाई की जाए। उन्होंने बताया कि विजय बार-बार कहते थे कि पुलिस और छात्रा का परिवार उन्हें जीने नहीं देगा। शनिवार रात इसी प्रताड़ना से हारकर उन्होंने मौत को गले लगा लिया।
वर्तमान में कोहेफिजा पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है। विजय की बेटी बेंगलुरु में रहती है, जिसके आने के बाद शव का पोस्टमार्टम किया जाएगा। थाना प्रभारी केजी शुक्ला का कहना है कि परिजनों के बयानों और साक्ष्यों के आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। एक छात्रा के करियर के दबाव ने पहले एक घर का चिराग बुझाया, और अब जांच के दबाव ने दूसरे हंसते-खेलते परिवार के मुखिया को छीन लिया है।