सूत्रों के अनुसार, यह पल पूरी तरह औपचारिक कार्यक्रम के बीच अचानक सामने आया, जिससे माहौल कुछ समय के लिए बेहद सहज और अनौपचारिक हो गया।
पीएम कमला प्रसाद बिसेसर ने भी लिया हल्के अंदाज में
इस मौके पर त्रिनिदाद एंड टोबैगो की प्रधानमंत्री कमला प्रसाद बिसेसर ने भी मुस्कुराते हुए टिप्पणी की और कहा कि स्पीकर से यह एक छोटी-सी चूक हो गई है। उन्होंने यह भी कहा कि डॉ. जयशंकर को त्रिनिदाद से जुड़ा मानना अपने आप में स्वाभाविक है, क्योंकि दोनों देशों के रिश्ते ऐतिहासिक और गहरे हैं। उनकी यह प्रतिक्रिया सदन में मौजूद लोगों के बीच और भी मुस्कुराहट का कारण बनी।
‘मिनी इंडिया’ से गहरे जुड़े हैं रिश्ते
त्रिनिदाद एंड टोबैगो को अक्सर “मिनी इंडिया” कहा जाता है, क्योंकि यहां की आबादी में बड़ी संख्या भारतीय मूल के लोगों की है।
देश की कुल आबादी का लगभग 40% से अधिक हिस्सा भारतीय मूल का है
करीब 5.5 लाख से ज्यादा भारतीय मूल के लोग यहां रहते हैं
दोनों देशों के संबंध 19वीं सदी के प्रवासी इतिहास से जुड़े हैं
औपनिवेशिक काल में बड़ी संख्या में भारतीय मजदूर यहां लाए गए थे, जिन्होंने बाद में देश के सामाजिक और सांस्कृतिक ढांचे को गहराई से प्रभावित किया।
अपने दौरे के दौरान विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने दोनों देशों के बीच सहयोग को और मजबूत करने पर जोर दिया। उन्होंने कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में साझेदारी विस्तार की बात कही—
प्रमुख क्षेत्र
फार्मा सेक्टर: भारत की जेनेरिक दवाओं के आयात और सहयोग को बढ़ावा
ऊर्जा क्षेत्र: रिफाइनिंग और निवेश में नए अवसर
तकनीक व इंफ्रास्ट्रक्चर: द्विपक्षीय साझेदारी को विस्तार देने पर जोर
Trinidad Parliament Speaker: Please welcome Dr. S Jaishankar, the Foreign Minister of Trinidad. Oh I’m sorry! The Foreign Minister of India
Trinidad PM (smiling): You made an important slip there Mr. Speaker. I would like to also recognise Dr. Jaishankar as coming from Trinidad pic.twitter.com/zK1aubxPFv
— Shashank Mattoo (@MattooShashank) May 10, 2026
विशेषज्ञों के अनुसार यह यात्रा सिर्फ कूटनीतिक नहीं, बल्कि रणनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण है—
कैरेबियन क्षेत्र में भारत की उपस्थिति मजबूत होगी
प्रवासी भारतीय समुदाय के संबंध और प्रगाढ़ होंगे
डिजिटल और ऊर्जा सहयोग को नई गति मिलेगी
त्रिनिदाद संसद में हुआ यह हल्का-फुल्का वाकया भले ही एक जुबानी चूक था, लेकिन इसने भारत और त्रिनिदाद एंड टोबैगो के बीच गहरे, आत्मीय और ऐतिहासिक संबंधों को और अधिक जीवंत बना दिया। जयशंकर की यह यात्रा दोनों देशों के बीच सहयोग के नए अध्याय की शुरुआत मानी जा रही है।