रिपोर्ट के मुताबिक, यह घोषणा यूनिवर्सिटी के रेनॉल्ड्स कोलिजियम में आयोजित दीक्षांत समारोह के दौरान हुई। समारोह में मुख्य वक्ता के तौर पर पहुंचे अनिल कोचर ने कहा कि यह फैसला उनके दिवंगत पिता प्रकाश चंद कोचर को सम्मान देने के लिए लिया गया है। उनके पिता कई दशक पहले पंजाब से अमेरिका आए थे और कठिन संघर्ष के बाद परिवार को नई पहचान दिलाई थी।
अनिल कोचर ने अपने संबोधन में कहा कि शिक्षा किसी भी युवा के भविष्य की सबसे बड़ी ताकत होती है, लेकिन बढ़ते एजुकेशन लोन कई छात्रों के सपनों पर भारी पड़ जाते हैं। उन्होंने कहा कि वे चाहते हैं कि छात्र अपने करियर की शुरुआत कर्ज के दबाव से नहीं, बल्कि आत्मविश्वास और आजादी के साथ करें।
समारोह में मौजूद छात्रों और उनके परिवारों के लिए यह पल बेहद भावुक बन गया। कई छात्र खुशी से रो पड़े, क्योंकि उन्हें उम्मीद नहीं थी कि उनकी पढ़ाई का बड़ा कर्ज अचानक खत्म हो जाएगा। यूनिवर्सिटी प्रशासन ने भी इस पहल को ऐतिहासिक बताते हुए अनिल कोचर की जमकर सराहना की।
बताया जा रहा है कि अनिल कोचर लंबे समय से शिक्षा और समाजसेवा से जुड़े कार्यों में सक्रिय हैं। वे मानते हैं कि समाज को वापस लौटाना हर सफल व्यक्ति की जिम्मेदारी है। उनकी यह पहल अब अमेरिका ही नहीं, बल्कि भारतीय समुदाय में भी प्रेरणा की मिसाल बन गई है।