नई दिल्ली । बच्चों का खाने के समय नखरे करना आजकल बहुत आम समस्या बन गई है। कई माता-पिता इस बात से परेशान रहते हैं कि उनका बच्चा ठीक से खाना नहीं खाता और जरूरी पोषक तत्वों की कमी हो सकती है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि सही तरीका अपनाकर और धैर्य रखकर इस आदत को आसानी से बदला जा सकता है।
छोटे बच्चों का स्वाद समय-समय पर बदलता रहता है, इसलिए किसी भी नए खाने को तुरंत पसंद कर लेना उनके लिए जरूरी नहीं होता। ऐसे में माता-पिता को लगातार प्रयास करते रहना चाहिए और छोटे-छोटे बदलावों के साथ उन्हें नए स्वाद से परिचित कराना चाहिए।
सबसे पहले जरूरी है कि बच्चे को बार-बार नए खाने का स्वाद चखने का मौका दिया जाए। कई बार किसी चीज को स्वीकार करने में समय लगता है, इसलिए एक ही बार में हार मान लेना सही नहीं है। नए खाने को उनकी पसंदीदा चीजों के साथ मिलाकर देना भी एक अच्छा तरीका हो सकता है।
इसके साथ ही बच्चों को अलग-अलग तरह का पौष्टिक भोजन देने पर ध्यान देना चाहिए। फल, सब्जियां, अनाज, दालें और डेयरी उत्पाद जैसे खाद्य पदार्थ उनके रोज के आहार का हिस्सा बनने चाहिए। खाने में रंग, स्वाद और बनावट की विविधता बच्चों को आकर्षित करती है और उनकी रुचि बढ़ाती है।
बच्चों को खाने की प्रक्रिया में शामिल करना भी बेहद प्रभावी तरीका माना जाता है। जब बच्चे खुद सब्जियां चुनते हैं या खाना बनाने में मदद करते हैं तो उनका खाने के प्रति उत्साह बढ़ जाता है। इससे वे खाने को एक जिम्मेदारी और मजेदार गतिविधि के रूप में देखने लगते हैं।
एक और महत्वपूर्ण बात यह है कि बच्चों पर खाने का दबाव नहीं डालना चाहिए। जब तक बच्चा स्वस्थ है और उसका विकास सामान्य है, तब तक उसे उसकी भूख के अनुसार खाने देना बेहतर होता है। जबरदस्ती करने से अक्सर खाने के प्रति नकारात्मक सोच विकसित हो सकती है।
खाने की मात्रा भी उम्र के अनुसार संतुलित होनी चाहिए। छोटे हिस्सों में भोजन देना बच्चों के लिए अधिक आसान और स्वीकार्य होता है। साथ ही, अच्छे खाने की आदतों के लिए तारीफ करना भी उन्हें प्रोत्साहित करता है।
खाने को इनाम या सजा से जोड़ना भी सही नहीं माना जाता, क्योंकि इससे बच्चे भोजन को गलत तरीके से समझने लगते हैं। इसके बजाय स्वस्थ खाने को रोजमर्रा की सामान्य आदत बनाना जरूरी है।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि बच्चे वही सीखते हैं जो वे अपने माता-पिता को करते हुए देखते हैं। अगर घर में सभी लोग मिलकर संतुलित और पौष्टिक भोजन करते हैं, तो बच्चे भी धीरे-धीरे उसी आदत को अपनाने लगते हैं।