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बड़ा खुलासा: CBSE 12th में प्राइवेट स्कूल पीछे, लड़कियों ने हर सेक्टर में दिखाया दम


नई दिल्ली। इस बार के Central Board of Secondary Education (CBSE) 12वीं रिजल्ट 2026 ने देश की स्कूली शिक्षा व्यवस्था की एक स्पष्ट तस्वीर सामने रख दी है। परिणामों में जहां सरकारी मॉडल पर आधारित स्कूलों ने शानदार प्रदर्शन किया, वहीं निजी स्कूलों का प्रदर्शन अपेक्षाकृत कमजोर रहा।

सबसे बेहतर प्रदर्शन जवाहर नवोदय विद्यालय (JNV) और केंद्रीय विद्यालय (KV) ने किया। इन संस्थानों ने लगातार उच्च पास प्रतिशत के साथ यह साबित किया कि अनुशासन, नियमित मूल्यांकन और गुणवत्तापूर्ण शिक्षण व्यवस्था का सीधा असर छात्रों के परिणामों पर पड़ता है। JNV का पास प्रतिशत 98.16% और KV का 97.90% दर्ज किया गया, जो राष्ट्रीय औसत से काफी ऊपर है।

दूसरी ओर, आदिवासी क्षेत्रों में संचालित एकलव्य मॉडल रेजिडेंशियल स्कूल (EMRS) ने भी बेहतर प्रदर्शन किया और सीमित संसाधनों के बावजूद 85.47% का पास प्रतिशत हासिल किया। यह संकेत देता है कि सही दिशा और प्रयासों से परिणाम बेहतर किए जा सकते हैं।

सबसे चिंताजनक स्थिति निजी या इंडिपेंडेंट स्कूलों की रही, जहां सबसे ज्यादा छात्र पंजीकृत होने के बावजूद पास प्रतिशत केवल 76.85% रहा। यह सभी श्रेणियों में सबसे कम है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रदर्शन के पीछे कई कारण हो सकते हैं बढ़ता शैक्षणिक दबाव, परीक्षा की तैयारी में कमी और छात्रों पर मानसिक तनाव।

पूरे देश में एक और महत्वपूर्ण ट्रेंड सामने आया हर श्रेणी में छात्राओं ने छात्रों से बेहतर प्रदर्शन किया। भोपाल रीजन में भी लड़कियों का पास प्रतिशत 82.19% रहा, जबकि लड़कों का 76.87% रहा। यह अंतर लगभग 5% का है, जो शिक्षा में बढ़ती महिला भागीदारी और उनकी निरंतरता को दर्शाता है।

भोपाल रीजन, जो देश के सबसे बड़े रीजन में से एक है, इस बार राष्ट्रीय स्तर पर 19वें स्थान पर रहा। कुल 1291 स्कूलों वाले इस रीजन का प्रदर्शन राष्ट्रीय औसत से पीछे रहा, जिससे शिक्षा विशेषज्ञों ने गुणवत्ता सुधार की जरूरत पर जोर दिया है।

आंकड़ों के अनुसार, कुल छात्रों में से 12.14% विद्यार्थी ऐसे रहे जो सभी विषयों में असफल हो गए। यह एक गंभीर संकेत है, जो पढ़ाई के स्तर, डिजिटल डिस्ट्रैक्शन और पोस्ट-कोविड सीखने की गिरावट की ओर इशारा करता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि सरकारी स्कूलों की सफलता का मुख्य कारण नियमित मॉनिटरिंग, प्रशिक्षित शिक्षक और संरचित शिक्षा प्रणाली है। वहीं निजी स्कूलों में व्यावसायिक दबाव और असमान शिक्षण गुणवत्ता इसके कमजोर प्रदर्शन की वजह हो सकती है।

कुल मिलाकर यह रिजल्ट बताता है कि शिक्षा में सिर्फ फीस या संसाधन ही नहीं, बल्कि अनुशासन, गुणवत्ता और लगातार निगरानी ही असली सफलता की कुंजी है।

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