Mahakaushal Times

डॉक्टर परिवार की घिनौनी साजिश: 4 बच्चों की सफलता के बाद 5वें के लिए खरीदा पेपर, पूरा कुनबा CBI के जाल में फंसा।


नई दिल्ली । राजस्थान के जयपुर जिले से शुरू हुई यह कहानी किसी थ्रिलर फिल्म के पटकथा जैसी लगती है, जहाँ सफलता की सीढ़ियाँ चढ़ चुके लोग ही व्यवस्था की जड़ें खोदने में लग गए। जमवा-रामगढ़ के एक रसूखदार बीवाल परिवार ने अपनी साख को दांव पर लगाकर वह रास्ता चुना जो सीधे अपराध की दुनिया की ओर ले जाता है। इस परिवार की पृष्ठभूमि बेहद प्रभावशाली रही है, जिसके चार बच्चे पहले ही अपनी मेहनत के दम पर डॉक्टर बनकर समाज में मिसाल पेश कर चुके थे। लेकिन इस बार लालच और अनुचित तरीके से सफलता हासिल करने की जिद ने इस पूरे परिवार को केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी सीबीआई के शिकंजे में ला खड़ा किया है। नीट-यूजी 2026 की परीक्षा से ठीक पहले व्हाट्सएप पर तैरते कुछ पन्नों ने न केवल एक छात्र का भविष्य अंधकार में डाल दिया, बल्कि एक प्रतिष्ठित परिवार की बरसों की कमाई हुई इज्जत को भी मिट्टी में मिला दिया।

सीबीआई की जांच में सामने आया है कि इस साजिश का केंद्र बिंदु दिनेश बीवाल और उसके भाई मांगीलाल थे। इनका भतीजा विकास, जो पिछले साल इस कठिन परीक्षा में असफल हो गया था, इस बार उनके निशाने पर था। जांच अधिकारियों के अनुसार, यह डील गुरुग्राम और नासिक के अन्य गिरोहों के साथ मिलकर तय की गई थी। अप्रैल के अंतिम सप्ताह में जब हजारों छात्र रातों को जागकर अपनी तैयारी को अंतिम रूप दे रहे थे, तब यह परिवार व्हाट्सएप और टेलीग्राम के माध्यम से प्रश्नपत्रों के सौदे कर रहा था। दिनेश ने न केवल अपने परिजनों के लिए यह पेपर हासिल किया, बल्कि सूत्रों का कहना है कि उसने इसे लगभग दस अन्य लोगों के साथ भी साझा किया, जिससे यह जाल और भी गहरा होता चला गया। यह महज एक पेपर की चोरी नहीं थी, बल्कि उन लाखों ईमानदार छात्रों के सपनों के साथ खिलवाड़ था जो दिन-रात एक कर इस परीक्षा की तैयारी करते हैं।

इस पूरे फर्जीवाड़े का भंडाफोड़ सीकर के एक सजग कोचिंग शिक्षक की सतर्कता से हुआ। जब उन्होंने व्हाट्सएप पर वायरल हो रहे गेस पेपर की तुलना असली सवालों से की, तो उनके होश उड़ गए। उन्होंने बिना देरी किए अधिकारियों को ईमेल के जरिए इसकी सूचना दी, जिसके बाद राजस्थान पुलिस की स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप ने प्रारंभिक जांच शुरू की। हालांकि, जांच की कमान सीबीआई के हाथों में आने के महज चौबीस घंटों के भीतर ही बीवाल परिवार के तीन मुख्य सदस्यों को गिरफ्तार कर लिया गया। अब जांच का दायरा सीकर के उन कोचिंग संस्थानों तक भी पहुंच गया है, जहां यह संदेह जताया जा रहा है कि यह लीक हुआ पेपर बड़े पैमाने पर फैलाया गया था। इस मामले ने एक बार फिर से देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा की सुरक्षा व्यवस्था और तकनीकी खामियों को उजागर कर दिया है।

प्रशासनिक स्तर पर भी इस मामले ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जब स्थानीय जांच एजेंसियों को शुरुआती दिनों में ही पेपर लीक होने के पुख्ता संकेत मिल गए थे, तो आखिर एफआईआर दर्ज करने और कार्रवाई करने में इतनी देरी क्यों हुई। सरकार और संबंधित विभागों की यह चुप्पी उन दलालों और माफियाओं के लिए मददगार साबित हुई जिन्होंने सोशल मीडिया के जरिए इस प्रश्नपत्र को आग की तरह फैला दिया। वर्तमान में सीबीआई इन सभी आरोपियों को दिल्ली ले जाकर कड़ी पूछताछ कर रही है ताकि इस गिरोह की जड़ों तक पहुंचा जा सके। यह मामला समाज के लिए एक कड़ा सबक है कि शॉर्टकट से हासिल की गई सफलता न केवल अस्थाई होती है, बल्कि वह आपके पूरे जीवन की गरिमा को भी समाप्त कर सकती है। अब इस परिवार के वो सदस्य जो वास्तव में डॉक्टर हैं, वे भी समाज के शक के घेरे में आ गए हैं और उनकी पूर्व की सफलताओं पर भी सवालिया निशान लग रहे हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

MADHYA PRADESH WEATHER

आपके शहर की तथ्यपूर्ण खबरें अब आपके मोबाइल पर