MP Police Training : मध्यप्रदेश पुलिस के सभी प्रशिक्षण केंद्रों को एक नया निर्देश जारी किया गया है। इन केंद्रों पर प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे कांस्टेबलों के लिए अब ‘भागवद् गीता’ का पाठ अनिवार्य कर दिया गया है। फिलहाल, इन संस्थानों में पहले से ही ‘रामचरितमानस’ का पाठ और उसकी शिक्षा दी जाती रही है। पुलिस प्रशिक्षण शाखा का मानना है कि इन धार्मिक ग्रंथों के पाठ से प्रशिक्षुओं को एक नैतिक और मर्यादित जीवन जीने में मदद मिलेगी।
ADG ने जारी किए निर्देश: लक्ष्य है नैतिकता और मर्यादा (MP Police Training)
अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (प्रशिक्षण) राजा बाबू सिंह ने राज्य के सभी आठ प्रशिक्षण विद्यालयों के अधीक्षकों को ये निर्देश जारी किए हैं। वर्तमान में, लगभग 4,000 युवा पुरुष और महिलाएं इन प्रशिक्षण केंद्रों में जुलाई से 09 महीने का कांस्टेबल प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं।
ADG राजा बाबू सिंह ने बताया कि इन ग्रंथों का अध्ययन जीवन में मर्यादा, नैतिकता और ईमानदारी के महत्व को समझने में सहायक होगा।
रामचरितमानस: अनुशासन और मर्यादित जीवन की नींव (MP Police Training)
ADG सिंह ने बीते जुलाई में प्रशिक्षण सत्र के उद्घाटन के दौरान ही इन संस्थानों में रामचरितमानस का पाठ करने का निर्देश दिया था। उनका तर्क था कि इससे प्रशिक्षुओं में अनुशासन आएगा। रामचरितमानस भगवान राम के गुणों और उनके 14 वर्षों के वनवास के आदर्शों का वर्णन करता है, जो मर्यादित जीवन जीने की प्रेरणा देता है।
भागवद् गीता: जीवन जीने की कला
1994 बैच के भारतीय पुलिस सेवा (IPS) अधिकारी राजा बाबू सिंह ने अब प्रशिक्षुओं के लिए भागवद् गीता को शामिल करने पर जोर दिया है। उन्होंने प्रशिक्षण विद्यालयों के निदेशकों से “भागवद् गीता के कम से कम एक अध्याय का पाठ अवश्य करवाएं” का निर्देश दिया। यह पाठ सत्र प्रशिक्षुओं के दैनिक ध्यान सत्र से ठीक पहले आयोजित किया जा सकता है।
एडीजी ने अपने संदेश में स्पष्ट किया, “भगवद् गीता हमारा शाश्वत धर्मग्रंथ है। इसका नियमित पाठ निश्चित रूप से हमारे प्रशिक्षुओं को धार्मिक जीवन जीने के लिए प्रेरित करेगा और उनका जीवन बेहतर होगा।” उनका मानना है कि गीता पढ़ने से “जीवन जीने की कला” आती है और जीवन का असली सार पता चलता है।
पूर्व में भी की थी ऐसी पहल (MP Police Training)
गौरतलब है कि इससे पहले, 2019 में जब राजा बाबू सिंह ग्वालियर रेंज के पुलिस प्रमुख थे, तब भी उन्होंने इसी तरह का एक अभियान शुरू किया था। उस दौरान उन्होंने कई स्थानीय जेल कैदियों और अन्य लोगों को भागवद् गीता की प्रतियां वितरित की थीं।