Balaghat News : बालाघाट। मध्यप्रदेश के बालाघाट जिले की एकीकृत शासकीय माध्यमिक शाला पांडुपिपरिया में शुक्रवार को उस वक्त हड़कंप मच गया, जब कक्षा 7वीं और 8वीं की छात्राओं ने स्कूल के प्राचार्य कोमल प्रसाद कोरी पर गंभीर आरोप लगाए। छात्राओं ने उन पर अशोभनीय व्यवहार और अभद्र भाषा का प्रयोग करने का आरोप लगाया। शिकायत के बाद, शिक्षा विभाग ने त्वरित कार्रवाई करते हुए प्रिंसिपल को पद से हटाकर बीईओ कार्यालय से संबद्ध (अटैच) कर दिया है।
छात्राओं के गंभीर आरोप (Balaghat News)
छात्राओं का कहना है कि प्राचार्य कोरी उनके साथ अभद्र भाषा का इस्तेमाल करते थे और यहां तक कि उनके शौचालय जाने पर भी नजर रखते थे। छात्राओं ने यह भी आरोप लगाया कि प्राचार्य स्कूल में भोजन बनाने आने वाली महिलाओं पर भी अश्लील टिप्पणियां करते थे।
त्वरित जांच और कार्रवाई (Balaghat News)
यह मामला तब गंभीर हो गया जब जिला पंचायत सदस्य नवीन मरकाम और गोंडवाना गणतंत्र पार्टी (गोंगपा) के पदाधिकारी स्कूल पहुंचे और छात्राओं से सीधे बातचीत की। इसी दौरान, तामिया के ब्लॉक एजुकेशन ऑफिसर (बीईओ) बीके सानेर भी मौके पर पहुंचे और छात्रों और स्टाफ के सदस्यों के बयान दर्ज किए।
बीईओ सानेर ने प्राथमिक जांच के आधार पर आरोपों को सही पाया। उन्होंने तत्काल प्रभाव से प्राचार्य कोमल प्रसाद कोरी को पांडुपिपरिया स्कूल से हटाकर बीईओ कार्यालय तामिया में संलग्न (अटैच) करने का आदेश दिया।
स्टाफ सदस्य की शिकायत से खुला मामला (Balaghat News)
दरअसल, इस पूरे मामले की शुरुआत मिडिल स्कूल की शिक्षिका दीपमाला बरड़े ने की थी। छिंदवाड़ा की निवासी दीपमाला जुलाई से इस स्कूल में पदस्थ हैं। उन्होंने ही सबसे पहले जिला पंचायत सदस्य और बीईओ से लिखित शिकायत कर प्राचार्य पर प्रताड़ना और अनुचित व्यवहार का आरोप लगाया था। इस शिकायत के बाद ही अन्य छात्राओं ने भी खुलकर अपनी बात रखी।
अधिकारियों और प्रिंसिपल का पक्ष
बीईओ बीके सानेर ने पुष्टि की, “प्राचार्य के खिलाफ मिली शिकायत पर जांच प्रक्रिया शुरू की जाएगी। हमने छात्राओं और शिकायतकर्ताओं के बयान दर्ज किए हैं। प्राथमिक जांच में मामला गंभीर प्रतीत हुआ, जिसके आधार पर प्राचार्य को पांडुपिपरिया से हटाकर बीईओ कार्यालय अटैच कर दिया गया है।”
वहीं, हटाए गए पूर्व प्राचार्य कोमल प्रसाद कोरी ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उनका कहना है, “यह मेरे खिलाफ एक साजिश है। स्कूल के अन्य शिक्षक और छात्रों को मेरे काम से कोई परेशानी नहीं है। शिकायतकर्ता (शिक्षिका) बीमारी के कारण समय पर स्कूल नहीं आती हैं, और शायद इसी वजह से उन्होंने मुझ पर झूठे आरोप लगाए हैं।”