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पटाखा फैक्ट्री हादसा: सिस्टम पर उठे सवाल, अधूरी यूनिट को कैसे मिला लाइसेंस?


देवास  देवास जिले की पटाखा फैक्ट्री में हुए विस्फोट ने एक बार फिर औद्योगिक सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी है। इस दर्दनाक हादसे में 5 मजदूरों की मौत हो चुकी है, जबकि 20 से अधिक लोग घायल हैं। कई मजदूर 90 से 99 प्रतिशत तक झुलस चुके हैं और अस्पतालों में जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रहे हैं। यह हादसा केवल एक फैक्ट्री ब्लास्ट नहीं, बल्कि एक बड़े सिस्टम की चुप्पी, लापरवाही और निगरानी तंत्र की विफलता का प्रतीक बन गया है।

लाइसेंस और नियमों के उल्लंघन पर सवाल
जानकारी के अनुसार फैक्ट्री को सीमित मात्रा में बारूद रखने और उपयोग करने का लाइसेंस दिया गया था, लेकिन मौके पर कथित रूप से नियमों से अधिक मात्रा में विस्फोटक सामग्री पाई गई। सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि इतनी बड़ी मात्रा में बारूद जमा किया जा रहा था, तो क्या संबंधित विभागों को इसकी जानकारी नहीं थी? या फिर जानकारी होने के बावजूद कार्रवाई नहीं की गई?

6 विभागों की जिम्मेदारी पर उठे सवाल
इस मामले में प्रशासनिक तंत्र के कई विभाग सीधे सवालों के घेरे में हैं-

राजस्व विभाग: फैक्ट्री की जमीन, सुरक्षा मानक और अनुमति की जांच
पुलिस विभाग: सुरक्षा और कानून-व्यवस्था की निगरानी
श्रम विभाग: मजदूरों की सुरक्षा और कार्य परिस्थितियों की जांच
बिजली विभाग: तकनीकी सुरक्षा और वायरिंग की जांच
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड: पर्यावरण और रासायनिक जोखिम की निगरानी
PWD/स्थानीय प्रशासन: भवन संरचना और आपातकालीन निकासी व्यवस्था
इन सभी विभागों की संयुक्त जिम्मेदारी के बावजूद किसी स्तर पर प्रभावी निरीक्षण न होने के आरोप लग रहे हैं।

राजनीतिक संरक्षण का आरोप भी चर्चा में
स्थानीय स्तर पर फैक्ट्री संचालक और राजनीतिक हस्तियों के बीच संबंधों को लेकर भी चर्चा तेज है। सोशल मीडिया और स्थानीय सूत्रों के अनुसार, प्रभावशाली संपर्कों के कारण लंबे समय तक कार्रवाई नहीं हुई। हालांकि इस दावे की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।

निरीक्षण व्यवस्था पर गंभीर सवाल
फैक्ट्री मात्र कुछ महीने पहले ही शुरू हुई थी, लेकिन इतने कम समय में बड़े पैमाने पर विस्फोटक सामग्री का संग्रह कैसे हुआ यह जांच का मुख्य विषय है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या किसी भी विभाग ने पिछले महीनों में मौके पर जाकर वास्तविक स्थिति की जांच की थी या केवल कागजों पर ही रिपोर्ट तैयार होती रही?

हादसे के बाद शुरू हुई कार्रवाई
घटना के बाद प्रशासन ने जांच टीम गठित कर दी है और फैक्ट्री संचालक के खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की गई है। मृतकों के परिजनों को मुआवजे की घोषणा भी की गई है, लेकिन सवाल यह है कि क्या केवल मुआवजा ही पर्याप्त है?

 सिर्फ हादसा नहीं, सिस्टम पर सवाल
देवास का यह विस्फोट अब केवल एक औद्योगिक दुर्घटना नहीं रहा, बल्कि यह प्रशासनिक निगरानी तंत्र की गंभीर विफलता का उदाहरण बन गया है। सवाल यह है कि क्या इस बार भी जांच केवल छोटे स्तर तक सीमित रहेगी, या जिम्मेदार अधिकारियों और पूरे सिस्टम की जवाबदेही तय होगी?

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